केशो मेहरा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखा पत्र — मतदाता सूची में सुधार के लिए रखे ठोस सुझाव
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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat. आगरा। पूर्व प्रदेश महामंत्री (संगठन), भारतीय जनता पार्टी, उत्तर प्रदेश एवं पूर्व विधायक, आगरा छावनी केशो मेहरा ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन परीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) का कार्य करने पर मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार को बधाई दी है। उन्होंने अपने पत्र में मतदाता सूची की पारदर्शिता और सटीकता को लेकर कई गंभीर सुझाव दिए हैं।
मतदाता सूची में गड़बड़ियों पर सवाल
श्री मेहरा ने अपने पत्र में कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) का दायित्व है कि वह अपने बूथ के अंतर्गत आने वाले प्रत्येक मकान में जाकर मतदाता सूची का गहन परीक्षण करें। लेकिन व्यवहार में ऐसा नहीं हो रहा है।
आगरा छावनी की सूचियों में विसंगतियां
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आगरा लोकसभा क्रमांक-18 के आगरा छावनी विधानसभा क्रमांक-87 में वर्ष 2024 लोकसभा चुनाव की मतदाता सूची और 2025 की मतदाता सूची में स्पष्ट गड़बड़ियां पाई गई हैं। चुनाव आयोग द्वारा प्रकाशित बूथ क्रमांक 330 और 331 की फोटोयुक्त मतदाता सूचियों को उन्होंने अपने पत्र में संलग्न किया है।
‘बिभव रिवेरा’ सोसाइटी के नाम दो अलग बूथों में दर्ज
मेहरा ने कहा कि रेजिडेंशियल सोसाइटी “बिभव रिवेरा”, मयूर टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स, फतेहाबाद रोड, आगरा में रहने वाले मतदाताओं के नाम दोनों बूथों — 330 और 331 — पर अंकित हैं।
उदाहरणस्वरूप:
सुरेश सांवल (बूथ संख्या 330, मतदाता क्रमांक 909 वर्ष 2024 और 792 वर्ष 2025)
समीर अग्रवाल (बूथ संख्या 331, मतदाता क्रमांक 564 वर्ष 2024 और 531 वर्ष 2025)
यदि BLO ने वास्तविक सत्यापन किया होता…
श्री मेहरा ने टिप्पणी की कि यदि बूथ लेवल ऑफिसर ने सोसाइटी में व्यक्तिगत रूप से जाकर यह कार्य किया होता, तो ऐसी त्रुटि कभी संभव नहीं होती। उनका कहना है कि इन सभी मतदाताओं के नाम एक ही बूथ क्रमांक पर होने चाहिए थे।
छूटे नहीं नाम, पर मृतकों के नाम अब भी दर्ज
पूर्व विधायक ने बताया कि कई मतदाताओं के नाम सूची में अब भी दर्ज हैं, जबकि वे काफी समय पहले यह सोसाइटी छोड़ चुके हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए लिखा—
“सुरेन्द्र कुमार सेठी पहले इस सोसाइटी में रहते थे, अब आगरा में नहीं रहते, नोएडा में रहते हैं। उनका नाम मतदाता सूची में बूथ संख्या 331 में मतदाता क्रमांक 607 (वर्ष 2024) व 578 (वर्ष 2025) पर दर्ज है।”
इसी तरह उन्होंने बताया कि मृत व्यक्तियों के नाम तक सूची में नहीं काटे गए हैं।
“श्रीमती कीर्ति सेठी का स्वर्गवास हो चुका है, किन्तु उनका नाम मतदाता सूची में बूथ संख्या 331 में मतदाता क्रमांक 608 (वर्ष 2024) व 579 (वर्ष 2025) पर दर्ज है।”
शपथपत्र से तय हो जिम्मेदारी
बूथ लेवल ऑफिसर से एक निर्धारित प्रपत्र पर शपथपत्र लिया जाए कि–
“मैंने अपने बूथ के प्रत्येक मकान में स्वयं जाकर यह मतदाता सूची तैयार की है, मैं पूर्ण सत्यनिष्ठा के साथ प्रमाणित करता हूँ कि यह मतदाता सूची सही है।”
वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के बाद ही सूची प्रकाशित हो
बूथ लेवल ऑफिसर द्वारा तैयार की गई मतदाता सूची, जो शपथपत्र द्वारा प्रमाणित हो, उसे तहसीलदार, उप जिलाधिकारी (एस0डी0एम0) एवं जिला चुनाव अधिकारी (जिलाधिकारी) द्वारा हस्ताक्षरित होने के पश्चात ही प्रकाशित होना चाहिए। अनुभव में यह आया है कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा बड़ी संख्या में नाम बढ़ाने अथवा काटने का निर्णय तहसीलदार स्तर पर अपने आप ले लिया जाता है।
राजनीतिक दलों की भागीदारी से बढ़े पारदर्शिता
मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के महानगर/जिला अध्यक्षों द्वारा बूथ लेवल एजेंटों का नाम भी विधिवत दिया जाता है। अतः यह उचित होगा कि बूथ लेवल ऑफिसर द्वारा तैयार की गई मतदाता सूची पर प्रत्येक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के बूथ लेवल एजेंट भी हस्ताक्षर करें और मुहर लगाएं। इसके साथ ही बूथ लेवल एजेंटों से भी शपथपत्र भरवाया जाए कि सूची पूरी तरह सही है। इससे भविष्य में कोई भी राजनीतिक दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न नहीं लगा सकेगा।
आधार कार्ड से जुड़े पते का प्रयोग हो
मतदान के दिन विभिन्न पहचान पत्रों में से एक आधार कार्ड भी मान्य है। मेहरा ने कहा, “यदि मतदाता सूची तैयार करते समय आधार कार्ड में दिए गए पते को शामिल किया जाए, तो एक ही सोसाइटी या भवन में निवास करने वाले सभी मतदाताओं के नाम अपने आप एक बूथ पर दर्ज हो जाएंगे।” इससे सूची की सटीकता और एकरूपता बढ़ेगी।
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