आगरा। प्रकृति जब अपना रौद्र रूप धारण करती है, तब चाहे इंसान हो या जानवर उसके आगे किसी का बस नहीं चलता। ये हम इसकारण कह रहे हैं, कि इन दिनों चंबल नदी अपना रौद्र रूप दिख रही हैं। आगरा के बाह, पिनाहट क्षेत्र में चंबल नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
शुक्रवार की सुबह तक चंबल के आसपास के गांव, घर और खेत खलियान में बाढ़ का पानी भर गया है। स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। वहीं, किसानों के मकान आधे-आधे पानी में डूबे हुए हैं।
चंबल नदी अपना कहर पिछले कई दिनों से बरपा रही है। चंबल के आसपास के गांव पूरी तरह से जलमग्न हैं। हालात इसतरह के हैं कि लोग घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं। गांववासियों ने अपना राशन जुटाकर घर ही छतों पर शरण ले रखी है। वहीं कई लोग बीहड़ के ऊंचे ऊंचे टीलों पर रात काटने को मजबूर हैं।
बाह तहसील के कई गांव हैं जो बाढ़ की चपेट में हैं। इन गांव में बिजली व्यवस्था पूरी तरह से ठप है। लगभग 22 गांव के संपर्क मार्ग भी पूरी तरह से टूट चुके हैं।
लोग बाढ़ से अपनी जान बचाने के लिए छतों पर शरण लिए हुए हैं। खाने से लेकर उठना, बैठना, दिनचर्या छतों पर हो रही है। टॉर्च की रोशनी में लोग खाना बनाने को मजबूर हैं। इसके साथ ही लोगों का कहना है कि खतरा कभी भी बढ़ सकता है। संपर्क मार्ग बिल्कुल टूट चुके हैं। अब लोगों का उनका इकट्ठा किया हुआ राशन धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।
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