आगरा। ऐतिहासिक आगरा फोर्ट के मुख्य प्रवेश द्वार और मेट्रो स्टेशन के समीप बुधवार दोपहर आग की एक भीषण घटना ने लोगों में दहशत फैला दी। झाड़ियों और कूड़े के ढेर में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे उठा काला और जहरीला धुआं करीब एक किलोमीटर दूर से भी साफ देखा जा सकता था।
घंटों धधकती रही आग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर करीब 2 बजे सूखी झाड़ियों और प्लास्टिक कचरे में लगी आग ने तेजी से फैलकर विशाल गुबार का रूप ले लिया। आग करीब एक घंटे तक बेकाबू होकर धधकती रही। प्लास्टिक और ज्वलनशील सामग्री जलने के कारण फैली दुर्गंध और जहरीले धुएं से राहगीरों का सांस लेना भी दूभर हो गया। सड़क से गुजर रहे वाहन चालक और स्थानीय लोग इसे देखकर स्तब्ध थे।
मेट्रो ट्रैक और सुरक्षा पर चिंता
इस घटना ने सुरक्षा मानकों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस स्थान पर आग लगी, उसके ठीक ऊपर से मेट्रो का ट्रैक गुजर रहा है और पास में ही मेट्रो स्टेशन स्थित है। आग की लपटें काफी ऊंचाई तक उठ रही थीं, जिसे देख लोगों में इस बात की चिंता थी कि यदि यह आग मेट्रो की संपत्तियों तक पहुँचती, तो एक बड़ा हादसा हो सकता था।
प्रशासन की निष्क्रियता पर उठे सवाल
घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों और राहगीरों ने मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों की कथित निष्क्रियता पर भारी नाराजगी जताई। सपा नेता श्याम भोजवानी ने बताया कि उन्होंने करीब 45 मिनट तक आग को धधकते देखा, लेकिन उसे बुझाने के लिए समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। स्थानीय लोगों का मानना है कि किसी राहगीर द्वारा जलती बीड़ी या सिगरेट फेंकने के कारण सूखी घास ने आग पकड़ ली, जो कचरे के कारण और भयावह हो गई।
शहर में खुले में कूड़ा जलाने पर सख्त प्रतिबंध के बावजूद, इस तरह की घटनाएं प्रशासन की निगरानी और कार्यप्रणाली की पोल खोल रही हैं। लोगों ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।
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