शॉपिंग की बात आती है तो इसके पीछे अलग-अलग कारण होते हैं, कोई लेटेस्ट ट्रेंड के कपड़े अपने वॉरड्रोब में शामिल करने के लिए मार्केट जाता है तो कोई किसी फंक्शन, गिफ्ट देने, ऑफिस के लिए कपड़े लेने जैसी वजहों के कारण।
लेकिन एक ऐसा कारण भी है जिसके वजह से लोग बंपर शॉपिंग करते हैं। नहीं, नहीं हम डिस्काउंट की बात नहीं कर रहे, बल्कि हम तो ऐसे कारण की बात कर रहे हैं जो व्यक्ति को कंगाल तक बना सकता है।
कहीं आप भी तो नहीं ऐसे खरीदार
दरअसल, कई लोगों को अहसास तक नहीं होता लेकिन वह जो शॉपिंग कर रहे हैं वह नॉर्मल शॉपिंग नहीं, बल्कि उनके इमोशन्स के कारण है। अपनी इमोशनल प्रॉब्लम्स को भूलने या रिलीज करने के लिए जब शॉपिंग को जरिया बनाया जाता है तो उसे ‘इमोशनल स्पेंडिंग’ या ‘इमोशनल शॉपिंग’ कहते हैं। हम बता रहे हैं इस तरह की शॉपिंग से जुड़े कुछ लक्षणों के बारे में, जिससे आप समझ सकते हैं कि कहीं आप इमोशनल शॉपिंग तो नहीं कर रहे।
बिना वजह शॉपिंग पर जाना
अगर आप बिना वजह शॉपिंग पर जा रहे हैं तो इसके दो कारण हो सकते हैं या तो यह सिर्फ फन के लिए है या फिर यह खुद को अच्छा फील करवाने के लिए है। अगर शॉपिंग करते ही आपको तुरंत बहुत अच्छा महसूस होता है, तो यह कोई नॉर्मल चीज नहीं है, क्योंकि यह आपकी शॉपिंग पर इमोशनल डिपेंडेंसी दिखाता है। ऐसी स्थिति में लोग अपने बजट का भी ख्याल नहीं रखते हैं और अंत में होता यह है कि उनके लिए महीना काटना तक मुश्किल हो जाता है।
बचने या नेगेटिव फीलिंग्स को भूलने के लिए शॉपिंग
आप किसी स्थिति से बचने के लिए या फिर नेगेटिव फीलिंग्स को भुलाने के लिए शॉपिंग का सहारा ले रहे हैं तो यह भी इमोशनल स्पेंडिंग में आता है। अब आप सोचेंगे कि इसमें भला दिक्कत क्या है? दरअसल, शॉपिंग जब तक चलेगी तब तक और उसके थोड़ी देर बाद तक को आप अच्छा फील करेंगे लेकिन एक बार इसका असर उतरेगा तो आपके सामने एक बार फिर आपकी परेशानी होगी। ऐसे में आपने जिस कारण से इतने पैसे खर्च किए वह किसी काम का नहीं रह जाएगा।
दूसरों को दिखाने के लिए
जी हां, ये भी एक तरह की इमोशनल शॉपिंग है। आप किसी के साथ शॉपिंग पर गए हैं और वह सामान लेता जाए लेकिन आप न लें इससे पैदा होने वाली स्थिति अगर आपको असहज कर देती है और आप खर्च करना शुरू कर देते हैं तो यह नॉर्मल शॉपिंग नहीं है।
चीजों को ज्यादा रिटर्न करना
दरअसल, होता यह है कि इमोशनल शॉपिंग के दौरान कई ऐसी चीजें ले ली जाती हैं जो असल में पसंद या फिर किसी काम की नहीं होती हैं। जब इमोशन्स कंट्रोल में आते हैं और व्यक्ति अपने द्वारा खरीदी चीजों को देखता है तब उसे इस बात का अहसास होता है और वह बार-बार चीजें लौटाने जाता है।
-एजेंसियां
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