उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नया तूफान खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की बेटी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी ने सूबे की सियासत को पूरी तरह गरमा दिया है। एक ओर समाजवादी पार्टी इस पूरे प्रकरण के पीछे भारतीय जनता पार्टी की सोची-समझी साजिश का आरोप लगा रही है, तो वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि “बेटी तो बेटी होती है” और किसी भी महिला के सम्मान के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी कतई स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।
क्या है डिंपल यादव का बड़ा दावा?
इस पूरे विवाद के बीच, मैनपुरी से सपा सांसद डिंपल यादव ने मोर्चा खोलते हुए एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है। शनिवार को लखनऊ में आयोजित डॉ. नवल किशोर शाक्य के ‘एम्पायर रिसॉर्ट’ के उद्घाटन समारोह में शिरकत करने पहुंचीं डिंपल यादव ने कहा कि उनकी बेटी अदिति के खिलाफ की गई बयानबाजी कोई इत्तेफाक नहीं है। उन्होंने सीधे तौर पर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सब राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय घोटाले के मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाने के लिए किया गया है।
उन्होंने सपा समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, “भाजपा के लोग आप लोगों को बरगला रहे हैं। वे जानबूझकर ऐसे विवाद खड़ा करते हैं ताकि श्रीराम मंदिर में हो रही चोरी और भ्रष्टाचार पर किसी का ध्यान न जाए।”
सरकार पर ‘मुद्दा भटकाने’ का आरोप
डिंपल यादव ने वर्तमान सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सरकार केवल मुद्दों को भटकाने का काम करती है। उन्होंने प्रदेश में हुई अन्य घटनाओं का जिक्र करते हुए भाजपा के ‘महिला सम्मान’ के दावों की धज्जियां उड़ाईं। डिंपल ने तल्ख लहजे में कहा, “जब हाथरस में हमारी बिटिया को जला दिया गया था, तब ये लोग (भाजपाई) कहां थे? जब कानपुर में एक बेटी के पिता को थाने में पीट-पीटकर मार डाला गया, तब क्या किसी भाजपाई ने कोई आवाज उठाई? तब इनका एक भी व्यक्ति सामने नहीं आता।”
’संविधान बचाना ही असली लक्ष्य’
सपा सांसद ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे भाजपा के इस ‘प्रोपेगेंडा’ के झांसे में न आएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी का मुख्य लक्ष्य केवल राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि देश के संविधान की रक्षा करना और लोकतंत्र को सुरक्षित रखना है। डिंपल यादव का यह बयान दर्शाता है कि समाजवादी पार्टी अब इस मुद्दे को लेकर रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक रुख अपना चुकी है और सरकार के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोलने की तैयारी में है।
यह विवाद अब व्यक्तिगत स्तर से उठकर पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। जहाँ एक तरफ भाजपा इसे नैतिकता के साथ जोड़कर देख रही है, वहीं विपक्ष इसे सरकार की नाकामी छुपाने की एक ‘काली चाल’ करार दे रहा है।
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