9 नवंबर 1936 को उत्तर प्रदेश के बनारस में पैदा हुए प्रसिद्ध कवि सुदामा पाण्डेय धूमिल की आज पुण्यतिथि है। उनकी मृत्यु 10 फरवरी 1975 को हुई थी।
हिंदी की समकालीन कविता के दौर में मील के पत्थर सरीखे धूमिल की कविताओं को पढ़ें तो आजादी के सपनों के मोहभंग की पीड़ा और आक्रोश की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति मिलती है। व्यवस्था जिसने जनता को छला है, उसको आइना दिखाना मानों धूमिल की कविताओं का परम लक्ष्य है।
धूमिल नाम से वे जीवन भर कविताएं लिखते रहे। सन् 1958 में आईटीआई (वाराणसी) से विद्युत डिप्लोमा लेकर वे वहीं विद्युत अनुदेशक बन गये। 38 वर्ष की अल्पायु में ही ब्रेन ट्यूमर से उनकी मृत्यु हो गई।
सन् 1960 के बाद की हिंदी कविता में जिस मोहभंग की शुरूआत हुई थी, धूमिल उसकी अभिव्यक्ति करने वाले अंत्यत प्रभावशाली कवि हैं । उनकी कविता में परंपरा, सभ्यता, सुरुचि, शालीनता और भद्रता का विरोध है क्योंकि इन सबकी आड़ में जो हृदय पलता है, उसे धूमिल पहचानते हैं। कवि धूमिल यह भी जानते हैं कि व्यवस्था अपनी रक्षा के लिये इन सबका उपयोग करती है इसलिये वे इन सबका विरोध करते हैं। इस विरोध के कारण उनकी कविता में एक प्रकार की आक्रामकता मिलती है किंतु उससे उनकी कविता की प्रभावशीलता बढ़ती है। धूमिल अकविता आन्दोलन के प्रमुख कवियों में से एक हैं। धूमिल अपनी कविता के माध्यम से एक ऐसी काव्य भाषा विकसित करते हैं जो नई कविता के दौर की काव्य- भाषा की रुमानियत, अतिशय कल्पनाशीलता और जटिल बिंबधर्मिता से मुक्त है। उनकी भाषा काव्य-सत्य को जीवन सत्य के अधिकाधिक निकट लाती है।
ऐसी ही कुछ कविताएं यहां पढ़िए-
मेरे घर में पांच जोड़ी आंखें हैं
मां की आँखें
पड़ाव से पहले ही
तीर्थ-यात्रा की बस के
दो पंचर पहिए हैं।
पिता की आंखें…
लोहसांय-सी ठण्डी सलाखें हैं।
बेटी की आंखें… मन्दिर में दीवट पर
जलते घी के
दो दिये हैं।
पत्नी की आंखें, आंखें नहीं
हाथ हैं, जो मुझे थामे हुए हैं।
वैसे हम स्वजन हैं,
करीब हैं
बीच की दीवार के दोनों ओर
क्योंकि हम पेशेवर ग़रीब हैं।
रिश्ते हैं,
लेकिन खुलते नहीं हैं।
और हम अपने ख़ून में इतना भी लोहा
नहीं पाते
कि हम उससे एक ताली बनाते
और भाषा के भुन्नासी ताले को खोलते
रिश्तों को सोचते हुए
आपस में प्यार से बोलते
कहते कि ये पिता हैं
यह प्यारी मां है,
यह मेरी बेटी है
पत्नी को थोड़ा अलग
करते…तू मेरी
हमबिस्तर नहीं…मेरी
हमसफ़र है
हम थोड़ा जोखिम उठाते
दीवार पर हाथ रखते और कहते…
यह मेरा घर है
-Legend News
- संयुक्त राष्ट्र की बजट प्रक्रिया और वित्तीय स्थिति पर उच्चस्तरीय चर्चा: राजदूत हरीश पार्वथनेनी के साथ बैठक में शामिल हुए सांसद नवीन जैन - October 21, 2026
- आगरा के ट्रांस यमुना क्षेत्र में सनसनीखेज वारदात: किचन में खाना बना रही बहन पर बड़े भाई ने चलाई गोली, आईसीयू में भर्ती - October 21, 2026
- राहुल गांधी के अचानक विदेश दौरे पर सियासी घमासान: सवाल पूछने पर बोले शशि थरूर — “मैं कोई ट्रैवल एजेंट नहीं हूँ” - October 21, 2026