आगरा: ताजनगरी की सफाई और व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाने का मंत्र सीखने के लिए नगर निगम के 76 पार्षद शनिवार को सात दिवसीय स्टडी टूर पर रवाना हो गए। यह दल दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों बेंगलुरु, ऊटी और मैसूर का दौरा करेगा। इस पूरी यात्रा पर नगर निगम के खजाने से लगभग 55 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सभी पार्षद 3 अप्रैल को वापस आगरा लौटेंगे।
सफर का मकसद: बेंगलुरु का IT मॉडल और मैसूर की स्वच्छता
पार्षदों की इस यात्रा का आधिकारिक उद्देश्य तकनीकी और प्रशासनिक बारीकियों को समझना है। सात दिनों के दौरान पार्षद निम्नलिखित विषयों पर अध्ययन करेंगे:
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट: मैसूर जैसे स्वच्छ शहरों में कूड़ा निस्तारण की तकनीक।
स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल: बेंगलुरु का आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम।
IT आधारित सेवाएं: नागरिक सुविधाओं के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल।
पर्यावरण संरक्षण: ऊटी और अन्य निकायों में स्वच्छता व पर्यावरण के बीच संतुलन।
दिल्ली एयरपोर्ट से भरी उड़ान
शनिवार सुबह 10 बजे सभी पार्षद नगर निगम कार्यालय पर एकत्रित हुए। यहाँ से तीन लग्जरी बसों के जरिए उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट भेजा गया, जहाँ से वे बेंगलुरु के लिए रवाना हुए। पार्षदों में इस यात्रा को लेकर काफी उत्साह देखा गया, लेकिन जनता और जानकारों की नजरें इसके ‘आउटपुट’ पर टिकी हैं।
सवालिया निशान: पिछली यात्राओं की कोई ‘रिपोर्ट’ नहीं
नगर निगम के इस भारी-भरकम खर्च पर सवाल भी उठ रहे हैं। इतिहास गवाह है कि पिछले दो स्टडी टूर के बाद किसी भी पार्षद ने अब तक कोई औपचारिक रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत नहीं की।
नियम के अनुसार, पार्षदों को अन्य शहरों के अच्छे कार्यों की बिंदुवार रिपोर्ट तैयार करनी होती है और बैठक में अपने अनुभव साझा करने होते हैं ताकि उन्हें आगरा में लागू किया जा सके।
अब देखना यह होगा कि 55 लाख की इस ‘पाठशाला’ से लौटने के बाद पार्षद अपने वार्डों में कोई ठोस बदलाव लाते हैं या यह दौरा भी पिछली बार की तरह महज एक ‘पर्यटन’ बनकर रह जाएगा।
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