Mathura, Uttar Pradesh, India. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मथुरा (Mathura) से बड़ी खबर आ रही है। श्री श्रीकृष्ण जन्मभूमि Shri Krishna Janmabhoomi से मस्जिद हटाने की याचिका न्यायालय ने स्वीकार कर ली (Court accepts petition to remove mosque)। याचिका 57 पेज की है। इस मामले में अगली सुनवाई अब 18 नवंबर, 2020 को होगी। यह अपील जिला जज मथुरा (District judge Mathura) साधनी रानी ठाकुर (sadhana rani Thakur) की कोर्ट में 12 अक्टूबर 2020 को दायर की गई थी। कोर्ट ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान, ईदगाह ट्रस्ट, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, शाही मस्जिद ईदगाह (Sri Krishna Janmasthan Seva Sansthan, Idgah Trust, Sunni Central Waqf Board, Shahi Masjid Idgah) को नोटिस भी भेजा है।
क्या है प्रकरण
मथुरा की सीनियर सिविल जज छाया शर्मा की अदालत में श्रीकृष्ण ठाकुरजी विराजमान सहित कई भक्तगणों को वादी बनाते हुए मांग की है कि 12 अक्टूबर, 1968 को हुए समझौता और 20 जुलाई, 1973 को हुई डिक्री रद किया जाए। याचिका के जरिए 13.37 एकड़ जमीन पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मालिकाना हक मांगा है, जिसमें ईदगाह भी शामिल है। वाद में शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने का अनुरोध किया गया है। यह भी कहा गया है कि श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान को यह समझौता करने का अधिकार नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय के पिता-पुत्र अधिवक्ता हरीशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन द्वारा दायर वाद में 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर 1968 में हुए समझौते को गलत बताया गया।
कौन हैं वादी-प्रतिवादी
ये वाद भगवान श्रीकृष्ण विराजमान, कटरा केशव देव खेवट, मौजा मथुरा बाजार शहर की ओर से उनकी सखी के रूप में अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री और छह अन्य भक्तों ने दाखिल किया था। याचिका में यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही ईदगाह मस्जिद, श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट, श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान को पार्टी बनाया गया ।
भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की सखा रंजना अग्निहोत्री, प्रवेश कुमार, राजेश मणि त्रिपाठी, तरुणेश कुमार शुक्ला, शिवाजी सिंह, त्रिपुरारी तिवारी वादी हैं। जबकि यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही ईदगाह मस्जिद, श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट, श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान को पार्टी बनाया गया है।
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