नाथूराम गोडसे पर बनी एक फ़िल्म ‘Why I Killed Gandhi’ (मैंने गांधी को क्यों मारा) को लेकर विवाद छिड़ गया है.
कांग्रेस नेता नाना पटोले का कहना है कि गांधी के हत्यारे को हीरो के तौर पर दिखाना सरासर ग़लत है.
नाना पटोले ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “अगर गांधी जी के हत्यारे को हीरो के तौर पर दिखाया जाता है तो ये ग़लत है. गांधी और उनके विचार से हमारे देश को पहचाना जाता है इसलिए कांग्रेस इस फ़िल्म का विरोध करेगी. महाराष्ट्र में ये फ़िल्म रिलीज न हो इसके लिए हम मुख्यमंत्री से गुज़ारिश करेंगे.”
शॉर्ट फ़िल्म ‘व्हाई आई किल्ड गांधी’ 30 जनवरी 2022 को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ होने वाली है. इसी दिन महात्मा गांधी को गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी.
इस फ़िल्म में गोडसे का किरदार शिरूर से एनसीपी सांसद अमोल कोल्हे ने निभाई है. और इसी बात से इस फ़िल्म को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.
2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन में एनसीपी अहम हिस्सा रही है.
ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (एआईसीडब्लूए) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर फ़िल्म पर प्रतिबंध लगाने की गुज़ारिश की है. ट्विटर पर पोस्ट किए इस पत्र में एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा है कि इस फ़िल्म में गोडसे के किरदार को गौरवान्वित किया गया है.
पत्र में लिखा है, “फ़िल्म में गोडसे का किरदार लोकसभा के एक सांसद ने निभाया है जिन्होंने संविधान की शपथ ली है. इस फ़िल्म की रिलीज़ पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए.”
फ़िल्म पर बहस शुरू होने के बाद समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में एनसीपी नेता अमोल कोल्हे ने कहा है कि वो गांधी की विचारधारा को मानते हैं कि किसी भी हत्या को कभी सही नहीं ठहराया जा सकता.
उन्होंने कहा, “निजी तौर पर मैं मानता हूं कि गांधी की हत्या उन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में से एक है जिसको कतई सही नहीं ठहराया जा सकता. मैं उनकी विचारधारा को मानता हूं.”
हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि “एक कलाकार के तौर पर कभी-कभी आपको ऐसे किरदार निभाने पड़ते हैं जिनकी विचारधारा आपकी अपनी विचारधारा से अलग होती है और कैमरे के सामने जाते ही आपको इसे परे रखकर काम करना होता है.”
वहीं एक अख़बार के अनुसार फ़िल्म निर्माता का कहना है कि फ़िल्म गोडसे के उस बयान को आधार बनाकर बनाई गई है, जो उन्होंने गांधी की हत्या के मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट में दिया था.
निर्माता का कहना है कि ये 20वीं सदी के भारतीय इतिहास को अलग नज़रिए से देखने की कोशिश है.
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