नई दिल्ली। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को लेकर बढ़ते तनाव के बीच आज संविधान पर चर्चा की शुरुआत हो गई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में बहस की शुरुआत की। वित्त मंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी परिवार और वंशवाद की मदद के लिए बेशर्मी से संविधान में संशोधन करती रही। ये संशोधन लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए नहीं थे, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों की रक्षा के लिए थे, इस प्रक्रिया का इस्तेमाल परिवार को मजबूत करने के लिए किया गया।
उन्होंने लालू यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि मैं ऐसे राजनीतिक नेताओं को जानती हूं, जिन्होंने उन काले दिनों को याद रखने के लिए बच्चों का नाम मीसा के नाम पर रखने का फैसला किया और अब उन्हें उनके साथ गठबंधन करने में भी कोई आपत्ति नहीं है।
कांग्रेस ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन किया
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन का आरोप लगाते हुए कहा कि मजरूह सुल्तानपुरी और बलराज साहनी दोनों को 1949 में जेल भेजा गया था। 1949 में मिल मजदूरों के लिए आयोजित एक बैठक के दौरान मजरूह सुल्तानपुरी ने जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ लिखी गई एक कविता सुनाई और इसलिए उन्हें जेल जाना पड़ा। उन्होंने इसके लिए माफी मांगने से इनकार कर दिया और उन्हें जेल जाना पड़ा।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का कांग्रेस का रिकॉर्ड सिर्फ इन दो लोगों तक सीमित नहीं था। 1975 में माइकल एडवर्ड्स द्वारा लिखी गई राजनीतिक जीवनी “नेहरू” पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। उन्होंने “किस्सा कुर्सी का” नामक एक फिल्म पर भी प्रतिबंध लगा दिया, क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके बेटे पर सवाल उठाए गए थे।
निर्मला सीतारमण ने नेहरू सरकार पर साधा निशाना
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाहरलाल नेहरू की अगुआई वाली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा “1950 में सुप्रीम कोर्ट ने कम्युनिस्ट पत्रिका “क्रॉस रोड्स” और आरएसएस की संगठनात्मक पत्रिका “ऑर्गनाइजर” के पक्ष में फैसला सुनाया था। लेकिन इसके जवाब में, (तत्कालीन) अंतरिम सरकार ने सोचा कि पहले संविधान संशोधन की आवश्यकता है और इसे कांग्रेस द्वारा लाया गया था। यह मूल रूप से स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के लिए था। इसलिए भारत, एक लोकतांत्रिक देश जो आज भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गर्व करता है, ने पहली अंतरिम सरकार को एक संविधान संशोधन के साथ आते देखा जिसका उद्देश्य भारतीयों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाना था और वह भी संविधान को अपनाने के एक वर्ष के भीतर।”
संविधान समय की कसौटी पर खरा उतरा- सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत का संविधान समय की कसौटी पर खरा उतरा है। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, 50 से अधिक देश स्वतंत्र हो गए थे और उनका संविधान लिखा हुआ था। लेकिन कई देशों ने अपने संविधानों को बदल दिया, न केवल उनमें संशोधन किया बल्कि वस्तुतः उनके संविधान की पूरी विशेषता को ही बदल दिया। लेकिन हमारा संविधान बहुत से संशोधनों के बावजूद भी समय की कसौटी पर खरा उतरा है।
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