“कहा मैं एक जैसे रोल नहीं लेना चाहता था”
उत्तर प्रदेश, अगस्त 2025: कभी-कभी ज़िंदगी में आगे बढ़ने जितना ही जरूरी होता है थोड़ी देर रुककर साँस लेना। इस समय सन नियो के हाल ही में लॉन्च हुए शो ‘प्रथाओं की ओढ़े चुनरी : बिंदणी में नज़र आ रहे अभिनेता आकाश जग्गा के लिए यह ठहराव एक साल का ब्रेक रहा। हाल ही में आकाश ने इस ब्रेक की वजह और दोबारा टीवी पर वापसी की कहानी साझा की।
अपनी बात रखते हुए आकाश कहते हैं, “मैंने लगभग एक साल तक टीवी से ब्रेक लिया और सच कहूँ तो यह बहुत ज़रूरी था। इससे पहले मैंने एक निगेटिव किरदार निभाया था। उसके बाद मुझे बार-बार वैसी ही भूमिकाएँ ऑफर हो रही थीं। मैं नहीं चाहता था कि मैं उसी चक्र में फंस जाऊँ।
अगर किरदार थोड़े अलग होते तो शायद सोचता, लेकिन ज़्यादातर रोल रिपेटिटिव लग रहे थे। तभी मैंने ठहरकर इंतज़ार करने का फैसला किया। और जैसा अक्सर होता है, जब आप किसी चीज़ के पीछे भागना छोड़ देते हैं, तभी वह अपने आप आपके पास आती है। मेरे साथ भी यही हुआ। जैसे ही मैंने सोचना बंद किया कि अब क्या होगा, तभी कुंदन के रोल के लिए कॉल आ गया।”
आगे वह बताते हैं,“जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी तो मुझे यह बहुत दिलचस्प लगी। यह शो राजस्थान पर आधारित है और यह मेरा होमटाउन भी है। हैरानी की बात है कि मैंने इससे पहले कभी राजस्थानी पृष्ठभूमि वाला शो नहीं किया था, इसलिए यह मेरे लिए और भी खास हो गया। कुंदन का किरदार लेयर्ड, अनोखा और चैलेंजिंग है बिलकुल वैसा जैसा मैं ढूँढ रहा था। एक ऐसा रोल जो मुझे न सिर्फ सिखाए बल्कि बतौर एक्टर एक्साइट करे। सब कुछ सही समय पर बिल्कुल सही तरह से हो गया।”
शो के बारे में आकाश कहते हैं,“राजस्थान पर आधारित कई शो बने हैं, लेकिन यह शो सबसे अलग है क्योंकि इसमें हर पल अप्रत्याशित मोड़ आते हैं। शुरुआत से ही ट्विस्ट और टर्न हैं। हर किरदार की अपनी कहानी और गहराई है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, दर्शक हर किरदार के नए पहलू देखेंगे। यही लेयर्ड स्टोरीटेलिंग इस शो की सबसे बड़ी खासियत है। इसी वजह से प्रथाओं की ओढ़े चुनरी : बिंदणी मेरे लिए टीवी पर वापसी को लेकर परफेक्ट शो है।”
प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बिंदणी की कहानी है घेवर की जो एक चंचल और साहसी राजस्थानी गाँव की लड़की है। उसकी जिंदगी अचानक बदल जाती है जब किस्मत उसके परिवार में एक नवजात शिशु को ले आती है। दो अलग-अलग दुनिया के टकराने से शुरू होती है प्रेम, बलिदान और छुपे हुए सच की दास्तान। घेवर का सफर बन जाता है साहस और दृढ़ निश्चय की मिसाल जहाँ वो अपने प्रियजनों को सुरक्षित रखने की जद्दोजहद में नजर आती है।
देखिए प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बिंदणी रोज़ाना रात 9 बजे, सिर्फ सन नियो पर।
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