चीन के विदेश मंत्री वांग यी गुरुवार रात भारत पहुंचे। आज सुबह दस बजे वांग यी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार NSA अजीत डोभाल से मिलने पहुंचे। दोनों के बीच ये मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है। वांग यी मुलाकात कर यहां से निकल चुके हैं। पूर्वी लद्दाख में चीन और भारत के बीच टेंशन अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। उम्मीद है कि इस मुलाकात के बाद कोई सार्थक और पूर्णकालिक हल निकल सकता है। डोभाल से फिलहाल वांग यी की बातचीत हो रही है। इसके बाद वह सुबह करीब 11 बजे विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात करेंगे।
भारत से पहले वांग यी पाकिस्तान और अफगानिस्तान का दौरा भी कर चुके हैं। काबुल जाकर उन्होंने सबको चौंका दिया था। ये उनके प्लान का हिस्सा नहीं था। वांग यी का ये भारत दौरा ऐसे वक्त हो रहा है जब जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर उनके एक बयान को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर से जुड़ा मुद्दा पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है और चीन समेत अन्य देशों को इस पर बयान देकर हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।
वांग यी दिल्ली आने से पहले इस्लामाबाद में थे। उन्होंने इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी में कश्मीर को लेकर बयान दिया। भारत ने कड़ा विरोध जताया। कल उनके आने के ही समय भारत ने फिर कहा कि किसी भी देश को भारत के अंदरूनी मामले में बोलने का हक नहीं है। चीन ने पाकिस्तान को खुश करने के लिए इस्लामाबाद में वह बयान दिया होगा? लेकिन भारत ने भी अपना कड़ा पक्ष रखने में जरा भी समय नहीं लगाया। न यह सोचा कि चीनी विदेश मंत्री दिल्ली भी आ रहे हैं। काबुल होते हुए दिल्ली आए चीनी विदेश मंत्री क्षेत्रीय शांति पर भी कुछ कहते हैं कि नहीं, यह देखने की बात है। जानकार मानते हैं कि लद्दाख में तनाव और लगातार आमने-सामने अपनी सेना रखकर भारत ने चीन को कड़ा संदेश दिया है। भारत द्वारा चीनी कंपनियों और चीनी चीजों पर लगाए गए कई प्रतिबंधों का भी असर हुआ है। यही वजह है कि चीनी विदेश मंत्री को यहां आना पड़ा है।
-एजेंसियां
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