गोंडी विद्यालय बंद: आदिवासी संस्कृति के अस्तित्व को खतरा

प्रियंका सौरभ महाराष्ट्र में गोंडी-माध्यम विद्यालय का बंद होना आदिवासी समुदाय की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत के लिए एक चिंताजनक प्रवृत्ति का संकेत है। मध्य भारत में 2 मिलियन से अधिक व्यक्तियों द्वारा बोली जाने वाली गोंडी, गोंड जनजाति की पहचान के लिए आवश्यक है। गोंडी-माध्यम शिक्षा में कमी से न केवल भाषा के संरक्षण […]

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क्या सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने की साजिश का हिस्सा है औरंगजेब पर हमला?

संजय पराते महाराष्ट्र का पूरा नागपुर आज कर्फ्यू की चपेट में है। इसी नागपुर में आरएसएस का मुख्यालय है, जहां बरसों तक तिरंगा नहीं फहराया गया था। जिन लोगों ने इस मुख्यालय में घुसकर तिरंगे को फहराने का दुस्साहस किया था, उन्हें मुकदमेबाजी का सामना करना पड़ा था। भाजपा को दिशा-निर्देश भी यही से जारी […]

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खाद्य पदार्थों में कीटनाशक अवशेषों की बढ़ती समस्या

डॉ सत्यवान सौरभ भारत में जाँचे गए 50% से अधिक खाद्य नमूनों में कीटनाशक अवशेष पाए गए हैं। कुछ खाद्य पदार्थ, जैसे सब्ज़ियाँ, फल, अनाज, दालें और मसाले, विनियामक निकायों द्वारा निर्धारित अधिकतम अवशेष सीमा (MRL) से अधिक पाए गए हैं। कीटनाशकों का उपयोग फसलों पर कीटों, कवक और खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए […]

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लोककला के नाम पर अश्लीलता का तड़का, ग़लत दृश्य दिखाना, अश्लील नाटकों-गीतों का मंचन समाज से खिलवाड़

प्रियंका सौरभ एक ओर जहाँ कई लोग संस्कृति को प्रमोट करने के लिए अपना करियर, अपनी मेहनत और अपना सब कुछ दांव पर लगा रहे हैं तो कोई हमारी संस्कृति को इस तरह से बदनाम कर उसे अश्लील गानों के साथ परोस रहे हैं। अब आप ही सोचिए की अगर हमें ऐसी अश्लीलता ही दिखानी […]

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मॉडर्न परिवेश में जीवन का चरमसुख: नंगापन और फूहड़ता परोसती सोशल मीडिया

डॉ सत्यवान सौरभ मॉडर्न परिवेश में जीवन का चरमसुख अब फॉलोअर्स पाने और कमेंट आने पर निर्भर हो गया है। फ़ेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर नग्न अवस्था में तस्वीरें शेयर कर आज लड़कियाँ लाइक कमेंट पाकर ख़ुद को ऐसे अनुगृहित करती दिखाई देती है; मानो जीवन की सबसे अहम और ज़रूरी ऊंचाई को उन्होंने पा लिया […]

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मात्र पेड़ काटने से रोकना पर्यावरण का हल नहीं हो सकता: पूरन डावर

विषय गंभीर है, अगली 25 को सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई है। हमें पर्यावरण को समझना होगा और उसका हल क्या है, यह विचार करना होगा। मात्र पेड़ काटने से रोकना पर्यावरण का हल नहीं हो सकता। एग्रो फॉरेस्ट्री को खेती या फोकस इंडस्ट्री की श्रेणी में लाया जाना […]

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क्या महिला किसानों तक पहुँच रही है तकनीक?

प्रियंका सौरभ भारत की कृषि-खाद्य प्रणालियाँ, जिनमें कृषि, पशुधन, कृषि वानिकी और मत्स्य पालन शामिल हैं, महिलाओं के भुगतान और अवैतनिक श्रम दोनों पर बहुत अधिक निर्भर हैं। महिलाएँ भारतीय कृषि के लिए महत्त्वपूर्ण हैं, खाद्य उत्पादन, पशुधन प्रबंधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को समर्थन देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पूर्णकालिक ग्रामीण कार्यबल का लगभग […]

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प्रसिद्धि की बैसाखी बनता साहित्य में चौर्यकर्म

डॉ सत्यवान सौरभ हरियाणा के एक लेखक द्वारा राज्य गान के रूप में एक गीत के चयन को लेकर हाल ही में एक बहस छिड़ी है, जिस पर साहित्यिक चोरी का आरोप लगाया गया है। अन्य लेखकों ने इस मामले पर अपनी चिंता व्यक्त की है और इसे राज्य के मुख्यमंत्री के ध्यान में लाया […]

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जीवंत होली उत्सव की साक्षी बड़वा की समृद्ध होली परम्परा

गांव के ऐतिहासिक झांग आश्रम में सबसे बड़ी डफ मंडली बसंत पंचमी पर एक उत्सव की शुरुआत करती है, जो गांव के हर कोने को जीवंत धमाल से भर देती है। इसी तरह, बाबा रामदेव मेला मंदिर में होली उत्सव एक अनूठी शैली में मनाया जाता है। होली के दौरान, मंदिर में एक भव्य डफ […]

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राजनैतिक व्यंग्य समागम: हे भागवत जी, कुछ ऐसी कथा कहो कि आपका श्रोता सुनते-सुनते सो जाए!

1. हे भागवत जी, कुछ ऐसी भागवत-कथा कहो कि आपका श्रोता सुनते-सुनते सो जाए! : विष्णु नागर खबर है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिनिधि सभा की अगले महीने बंगलूरू में होने वाली बैठक में ‘हिंदू जागरण’ पर चर्चा होगी। यह अत्यंत शुभ विचार है, क्योंकि पिछले साढ़े दस साल से हिंदू को इतना जगाया […]

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