Mumbai, Maharashtra, India. बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार का बुधवार सुबह निधन हो गया है। सांस लेने में समस्या के चलते उन्हें बार-बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ रहा था। दिलीप कुमार को 30 जून को हिंदुजा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार की सुबह 7.30 बजे उनके निधन का समचार मिला। वे 98 साल के थे। अभिनेता की मौत से फिल्म उद्योग शोकमग्न है। हॉलीवुड की मदद से रामायण फिल्म बना रहे गुरु स्वरूप श्रीवास्तव ने शोक प्रकट किया है।
गुरु स्वरूप श्रीवास्तव ने शोक संदेश में कहा है- दिलीप कुमार बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता थे। उनका निधन बॉलीवुड के लिए अपार क्षति है। उन्होंने सामान्य परिवार से जीवन जीया और बॉलीवुड में छा गए। उनके संवाद आज भी याद किए जाते हैं। वे भारतीय सिनेमा के लीजेंड थे।1998 में वह पाकिस्तान के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान निशान-ए-इम्तियाज से भी सम्मानित किए गए।
गुरु स्वरूप श्रीवास्तव ने बताया कि ट्रेजेडी किंग कहलाने वाले दिलीप कुमार ने 1944 में ‘ज्वार भाटा’ फिल्म से अपने करियर शुरुआत की थी और अपने पांच दशक लंबे करियर में ‘मुगल-ए-आजम’, ‘देवदास’, ‘नया दौर’, ‘राम और श्याम’ जैसी लोकप्रिय फिल्में दीं। वह आखिरी बार 1998 में आई फिल्म ‘किला’ में नजर आए थे।
दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसंबर 1922 को पाकिस्तान में हुआ था और उनका पहला नाम यूसुफ खान था। बाद में उन्हें पर्दे पर दिलीप कुमार के नाम से शोहरत मिली। एक्टर ने अपना नाम एक प्रोड्यूसर के कहने पर बदला था, जिसके बाद उन्हें स्क्रीन पर दिलीप कुमार के नाम से लोग जानने लगे।
दिलीप कुमार की शुरुआती पढ़ाई नासिक में हुई। बाद में उन्होंने फिल्मों में अभिनय का फैसला किया और 1944 में रिलीज हुई फिल्म ज्वार भाटा से डेब्यू किया। शुरुआती फिल्में नहीं चलने के बाद अभिनेत्री नर जहां के साथ उनकी जोड़ी हिट हो गई। फिल्म जुगनू दिलीप कुमार की पहली हिट फिल्म बनी। दिलीप साहब ने लगातार कई फिल्में हिट दी हैं। उनकी फिल्म मुगल-ए-आजम उस वक्त की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी। अगस्त 1960 में रिलीज हुई यह फिल्म उस वक्त की सबसे महंगी लागत में बनने वाली फिल्म थी।
दिलीप कुमार को आठ फिल्मफेयर अवॉर्ड मिल चुके हैं। सबसे ज्यादा अवॉर्ड जीतने के लिए दिलीप कुमार का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। दिलीप कुमार को साल 1991 में पद्म भूषण और 2015 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। 1994 में दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा गया। 2000 से 2006 तक वह राज्यसभा के सदस्य भी रहे।
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