आगरा: ताजनगरी के गुटखा, तंबाकू और सिगरेट के बाजार में इन दिनों जबरदस्त अफरा-तफरी का माहौल है। थोक कारोबारियों ने केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाए गए टैक्स को हथियार बनाकर अवैध मुनाफाखोरी का नया रास्ता खोज लिया है। शिकायतें हैं कि शहर के बड़े थोक विक्रेता पैकिंग पर छपे मूल्य (MRP) से कहीं अधिक कीमत वसूल रहे हैं, जिससे छोटे फुटकर व्यापारियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
पुराना माल, नया रेट: डंपिंग का मास्टरप्लान
हकीकत यह है कि तीन महीने पहले जब तंबाकू उत्पादों पर 40% टैक्स वृद्धि की घोषणा हुई थी, तभी बड़े सिंडिकेट ने पुराने रेट पर करोड़ों रुपये का माल गोदामों में डंप कर लिया था। 1 फरवरी से नया टैक्स लागू होते ही, थोक व्यापारियों ने पुराने स्टॉक को ही ऊँचे दामों पर बेचना शुरू कर दिया।
ताज्जुब की बात यह है कि बाजार में अभी नए प्रिंट रेट (New MRP) वाले पैकेट पहुँचे भी नहीं हैं, लेकिन कीमतें पहले ही आसमान छू रही हैं।
बाज़ार में कीमतों की कड़वी हकीकत:
छोटे दुकानदारों द्वारा साझा की गई दरों की तुलना चौंकाने वाली है…
पान मसाला (150 रुपये वाला): अब 200 रुपये में थोक बिक्री।
सिगरेट (45 रुपये वाली): 65 से 70 रुपये तक वसूली।
75 रुपये वाला पैकेट: सीधे 110 रुपये पर पहुँचा।
550 रुपये वाला बल्क पैकेट: अब 700 रुपये की मांग।
फुटकर दुकानदार पिस रहे हैं बीच में:
छोटे व्यापारियों का कहना है कि वे दोहरी मार झेल रहे हैं। पीछे से माल महंगा मिल रहा है, लेकिन ग्राहक पैकेट पर छपे प्रिंट रेट से एक रुपया भी ज्यादा देने को तैयार नहीं। इसके चलते रोजाना दुकानों पर बहस और नोकझोंक हो रही है। व्यापारियों का मुनाफा खत्म हो चुका है और वे इस अवैध सिंडिकेट के खिलाफ प्रशासन से सख्त कार्रवाई की गुहार लगा रहे हैं।
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