आगरा: उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत आगरा जिला प्रशासन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। जिले के 35 सरकारी विभागों के लगभग 7 हजार कर्मचारियों का फरवरी माह का वेतन रोक दिया गया है। इन कर्मचारियों ने निर्धारित समय सीमा (31 जनवरी) तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण सार्वजनिक नहीं किया था।
क्यों हुई यह कार्रवाई?
नियमों के अनुसार, हर सरकारी सेवक को प्रतिवर्ष अपनी संपत्तियों का पूरा ब्योरा ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य है। शासन का उद्देश्य आय से अधिक संपत्ति बनाने वाले और भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों/कर्मचारियों पर नजर रखना है।
इन विभागों में मची खलबली
लापरवाही बरतने वाले 7 हजार कर्मचारियों में शिक्षा, राजस्व, स्वास्थ्य, विकास और लोक निर्माण विभाग जैसे प्रमुख महकमों के कर्मी शामिल हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि केवल वेतन रोकना ही अंतिम कदम नहीं है। यदि विवरण में गड़बड़ी पाई गई या जानबूझकर तथ्य छिपाए गए, तो विभागीय जांच और दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
वेतन बहाली की शर्त
प्रशासन ने सख्त संदेश दिया है कि जैसे ही संबंधित कर्मचारी पोर्टल पर अपनी संपत्ति का सही विवरण अपलोड कर देंगे, उनके वेतन बहाली की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस सख्ती के बाद अब सरकारी दफ्तरों में कर्मचारी आनन-फानन में अपना डेटा अपडेट करने में जुट गए हैं।
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