बारामती। महाराष्ट्र की राजनीति के एक सशक्त अध्याय का आज अंत हुआ। अपने लोकप्रिय नेता “अजित पवार” को अंतिम विदाई देने के लिए बारामती उमड़ पड़ी। केटवाड़ी गांव से शुरू हुई अंतिम यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ी, सड़कें लोगों से भरती चली गईं। फूलों से सजे वाहन पर रखा पार्थिव शरीर, और उसके पीछे चलता अपार जनसैलाब—यह दृश्य केवल एक अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि जनभावनाओं का सजीव प्रमाण था।
सुबह से ही कस्बे में शोक की छाया थी। बाजार बंद रहे, घरों की छतों और दुकानों के बाहर खड़े लोग नम आंखों से अपने नेता को नमन करते दिखे। विद्या प्रतिष्ठान ग्राउंड तक पहुंचते-पहुंचते भीड़ का सैलाब हर रिकॉर्ड तोड़ चुका था। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की रस्में पूरी हुईं। जैसे ही चिता को अग्नि दी गई, गूंजते नारों और सिसकियों ने माहौल को और भी भावुक कर दिया।
श्रद्धा की एकजुटता, राजनीति से ऊपर
अंतिम यात्रा और संस्कार में देश-प्रदेश के दिग्गज नेता मौन श्रद्धा में खड़े नजर आए। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री “अमित शाह”, केंद्रीय मंत्री “नितिन गडकरी”, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री “देवेंद्र फडणवीस”, उपमुख्यमंत्री “एकनाथ शिंदे”, “उद्धव ठाकरे”, सहित कई नेता मौजूद रहे। इस दृश्य ने साफ कर दिया कि विदाई के इस क्षण में दलों की सीमाएं पीछे छूट गईं।
परिवार का साहस, बहन का संबल
संस्कार के समय परिवार का दुख हर आंख में उतर आया। कठिन पल में बहन “सुप्रिया सुले”, परिवार के लिए ढाल बनकर खड़ी रहीं। उनका धैर्य और मौन सहारा, उस क्षण का सबसे सशक्त चित्र बना।
यादों में जीवित रहेंगे ‘दादा’
धुआं जब आसमान में घुला और भीड़ धीरे-धीरे छंटी, तब भी एक भाव हवा में बना रहा अजित दादा लोगों के थे और लोग दादा के। बारामती ने आज अपने बेटे को नहीं, अपनी आवाज़ को विदा किया।
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