इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ द्वारा प्रदेश के नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना पर सोमवार को लगाई गई रोक कल तक जारी रहेगी। नगर निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने में प्रक्रिया का पालन न करने का आरोप राज्य सरकार पर लगाते हुए दाखिल जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने यह आदेश दिया है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब देने के लिए एक दिन का और समय देने की मांग की गई थी जिसे न्यायालय ने मंजूर कर लिया।
इससे पहले प्रदेश सरकार ने 762 में 760 नगर निकायों में महापौर और चेयरमैन के सीटों के आरक्षण की अनंनतिम अधिसूचना जारी कर दी है। इनमें 17 नगर निगमों में महापौर के अलावा 199 नगर पालिका परिषद और और 544 नगर पंचायतों के चेयरमैन की सीटें शामिल हैं। हालांकि आरक्षण सभी 762 नगर निकायों के लिए निर्धारित कर दिए गए हैं। लखनऊ, कानपुर व गाजियाबाद समेत महापौर की आठ सीटों को अनारक्षित रखा गया है। 2017 में ये तीनों सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित थीं।
70 लाख बढ़ गई निकायों की आबादी
2017 में हुए निकाय चुनाव की तुलना में इस बार निकाय की सीमा में करीब 70 लाख अधिक आबादी शामिल हो गई है। 2017 में निकाय क्षेत्रों की आबादी 4.16 करोड़ थी, जो इस बार 4.85 करोड़ हो गई है। इसकी वजह 10 नगर निगमों समेत कुल 130 नगर निकायों का सीमा विस्तार और 111 नई नगर पंचायतों का का गठन किया जाना है।
यूपी में नगर पंचायतों का कार्यकाल समाप्त
यूपी में नगर पंचायतों का कार्यकाल 12 दिसंबर 2022 को पूरा हो गया है। इस संबंध में नगर विकास विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं।
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