शामली में एक कार्यक्रम के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने अयोध्या राम मंदिर दान विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लिए गए निर्णय का खुलकर समर्थन किया है। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से शंकराचार्य लगातार मुख्यमंत्री योगी के खिलाफ बयान देते रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने मुख्यमंत्री के एक कदम की प्रशंसा की है।
गोरक्षा के उद्देश्य से यात्रा निकाल रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जब शामली पहुँचे, तो मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने अयोध्या राम मंदिर दान प्रकरण पर अपनी राय रखी।
उन्होंने कहा कि अयोध्या दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को अपनी मीटिंग और अपने मंच से दूर रखने का जो निर्णय लिया, वह वास्तव में एक बहुत अच्छा कदम है। हम इसकी खुले दिल से प्रशंसा करते हैं।
शंकराचार्य ने तर्क दिया कि जिस समय किसी व्यक्ति के ऊपर गड़बड़ी के दाग लगे हों, उस समय उसे अपने पास बैठाने का समाज में गलत संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि सीएम योगी ने कम से कम इतना स्टैंड लिया, यह देखकर उन्हें अच्छा लगा।
राम मंदिर दान गबन प्रकरण के संबंध में जानकारी के लिए बता दें कि चंपत राय पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। ट्रस्ट के अनुरोध पर योगी सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन किया है, जो लगातार जांच कर रही है।
वहीं, राम मंदिर दान गबन विवाद पर शंकराचार्य काफी नाराज दिखे। उन्होंने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और राम मंदिर निर्माण समिति की ओर से लगातार घोटाले के आरोपों से इनकार किया जा रहा है।
उन्होंने इस मामले पर तीखे सवाल खड़े करते हुए कहा कि अगर कोई गड़बड़ी नहीं हुई है, तो फिर डीएम के जरिए यह संदेश क्यों दिलवाया जा रहा है कि संबंधित लोग बैठक में नहीं आएंगे और उनकी जगह प्रतिनिधियों को भेजा जा रहा है।
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