नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली की दिल्ली विधानसभा परिसर में लंबे समय से बनी बंदरों की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने एक अनोखी और दिलचस्प योजना पर अमल शुरू कर दिया है। विधानसभा परिसर में बार-बार घुसने वाले बंदरों को भगाने के लिए अब लंगूर की आवाज की नकल करने में माहिर प्रशिक्षित लोगों को तैनात किया जाएगा। इसके लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने बाकायदा टेंडर भी जारी कर दिया है।
अधिकारियों के मुताबिक, विधानसभा परिसर और उसके आसपास के इलाकों में दर्जनों बंदर सक्रिय रहते हैं। ये बंदर न सिर्फ परिसर में घुसकर अफरा-तफरी मचाते हैं, बल्कि बिजली के तारों, डिश एंटीना और अन्य तकनीकी उपकरणों पर कूदकर उन्हें नुकसान भी पहुंचाते हैं। इससे विधायकों, कर्मचारियों और आगंतुकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। बीते कुछ समय में बंदरों के कारण कई बार अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो चुकी है।
इन्हीं हालात को देखते हुए पीडब्ल्यूडी ने लंगूर की आवाज की नकल करने में सक्षम प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती का फैसला लिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह तरीका बंदरों को डराकर भगाने का सबसे प्रभावी और मानवीय उपाय माना जाता है, क्योंकि इसमें किसी भी जानवर को नुकसान नहीं पहुंचाया जाता। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ अपने साथ एक असली लंगूर भी ला सकेंगे, जिससे बंदरों पर डर का असर और अधिक पड़े।
अधिकारियों ने बताया कि पहले विधानसभा परिसर में लंगूर के पुतले लगाने की योजना पर काम किया गया था, लेकिन यह उपाय कारगर साबित नहीं हुआ। अनुभव में सामने आया कि बंदर अब इन पुतलों से डरते नहीं हैं, बल्कि कई बार उनके ऊपर बैठ जाते हैं। इससे पहले जिन लोगों को लंगूर की आवाज की नकल के लिए तैनात किया गया था, उनका अनुबंध समाप्त हो चुका है। इसी वजह से अब नए सिरे से टेंडर जारी कर प्रशिक्षित लोगों की नियुक्ति की जा रही है।
योजना के अनुसार, वर्किंग डे के साथ-साथ शनिवार को भी प्रशिक्षित कर्मियों को तैनात किया जाएगा। प्रत्येक कर्मी 8 घंटे की शिफ्ट में काम करेगा। तैनाती करने वाली एजेंसी की जिम्मेदारी होगी कि वह संचालन के दौरान आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए, अनुशासन बनाए रखे और सभी सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करे।
इसके अलावा अधिकारियों ने बताया कि तैनात कर्मियों के लिए प्रदर्शन-आधारित निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी, ताकि योजना की प्रभावशीलता पर नजर रखी जा सके। साथ ही, इन कर्मियों के लिए बीमा कवरेज की भी व्यवस्था की जाएगी, जिससे किसी भी अप्रिय स्थिति में उन्हें सुरक्षा मिल सके।
गौरतलब है कि वर्ष 2017 में एक बंदर विधानसभा सदन के भीतर घुस गया था, जिससे उस समय सरकारी स्कूलों में अतिथि शिक्षकों से जुड़ी चर्चा बाधित हो गई थी। उस घटना के बाद से ही विधानसभा परिसर में बंदरों की समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है। अब सरकार को उम्मीद है कि लंगूर की आवाज की नकल करने वाली यह योजना बंदरों की समस्या से स्थायी राहत दिलाने में कारगर साबित होगी।
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