आगरा विश्वविद्यालय में 25 जनवरी को होगा अखिल भारतीय साहित्यकार सम्मान समारोह व पुस्तक लोकार्पण

साहित्य

 

 

कल विश्वविद्यालय में होगा अखिल भारतीय साहित्यकार सम्मान समारोह व पुस्तक लोकार्पण
ब्रजभाषा काव्य मंच के द्वितीय वार्षिकोत्सव पर साहित्य का विराट उत्सव

ब्रज और हिंदी साहित्य को समर्पित भव्य आयोजन

आगरा।
कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी एवं भाषाविज्ञान विद्यापीठ, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा
के तत्वावधान में हिंदी साहित्य एवं ब्रजभाषा को समर्पित संस्था
ब्रजभाषा काव्य मंच के द्वितीय वार्षिकोत्सव के अवसर पर अखिल भारतीय साहित्यकार सम्मान समारोह, पुस्तक लोकार्पण एवं कवि सम्मेलन
का आयोजन 25 जनवरी (रविवार)
को विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क परिसर स्थित
डायमंड जुबली हॉल में किया जाएगा।

पोस्टर लोकार्पण के साथ आयोजन की औपचारिक घोषणा

कार्यक्रम का पोस्टर लोकार्पित करते हुए
ब्रजभाषा काव्य मंच के अध्यक्ष डॉ. रामेंद्र शर्मा ‘रवि’
ने बताया कि संस्था निरंतर हिंदी साहित्य और ब्रजभाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है।
संस्था का विशेष उद्देश्य नवोदित रचनाकारों को मंच प्रदान कर उन्हें साहित्य की मुख्यधारा से जोड़ना है।

देशभर के 150 साहित्यकार करेंगे विमर्श

डॉ. रामेंद्र शर्मा ‘रवि’ ने जानकारी दी कि इस आयोजन में
देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 150 साहित्यकार
भाग लेंगे। ये सभी साहित्यकार दिनभर हिंदी एवं ब्रजभाषा को
विश्व साहित्य पटल पर स्थापित करने
के लिए किए जा रहे प्रयासों, चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे।

गरिमामयी उपस्थिति से सजा पोस्टर लोकार्पण कार्यक्रम

पोस्टर लोकार्पण कार्यक्रम में
ब्रजभाषा काव्य मंच के अध्यक्ष रामेंद्र शर्मा ‘रवि’
के साथ
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गीतऋषि प्रो. सोम ठाकुर,
संस्कार भारती के बाँकेलाल गौड़,
शासकीय अधिवक्ता अशोक चौबे,
संजय गुप्त,
राजकुमार शास्त्री,
सचिन दीक्षित ‘सारंग’,
पदम गौतम,
संजय कुमार
सहित अनेक साहित्यकार व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

संपादकीय

आज के दौर में जब भाषाई जड़ें कमजोर पड़ती जा रही हैं और लोकभाषाएं उपेक्षा का शिकार हो रही हैं,
ऐसे समय में
ब्रजभाषा काव्य मंच
जैसी संस्था साहित्य और संस्कृति की रक्षा का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है।

इस मंच की आत्मा और ऊर्जा हैं
डॉ. रामेंद्र शर्मा ‘रवि’
वे केवल मंच संचालक या कवि नहीं, बल्कि ब्रजभाषा और हिंदी साहित्य के
निष्ठावान साधक
हैं। उन्होंने साहित्य को दिखावे से निकालकर साधना और संस्कार से जोड़ा है।

नवोदित रचनाकारों को मंच देना, उनकी रचनात्मकता को सम्मान देना और उन्हें आत्मविश्वास देना—
यह कार्य आसान नहीं होता, लेकिन रामेंद्र शर्मा ‘रवि’ ने इसे अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है।
उनकी नेतृत्व क्षमता ने ब्रजभाषा काव्य मंच को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

अखिल भारतीय साहित्यकार सम्मान समारोह जैसे आयोजन यह सिद्ध करते हैं कि साहित्य आज भी समाज को दिशा देने की शक्ति रखता है।
रामेंद्र शर्मा ‘रवि’ का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए
प्रेरणास्रोत और पथप्रदर्शक
है।

निस्संदेह, ब्रज की माटी से उठी यह साहित्यिक चेतना शब्दों के माध्यम से पूरे देश में सुगंध फैलाएगी।
ऐसे साहित्य साधकों को साधुवाद, जो भाषा को जीवित रखने के लिए निरंतर संघर्षरत हैं।

डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक

 

Dr. Bhanu Pratap Singh