आगरा। लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के पास आत्मदाह का प्रयास करने वाली महिला की पहचान आगरा निवासी सरजू यादव के रूप में हुई है। महिला का आरोप है कि आगरा के ट्रांस यमुना थाना में उसके साथ मारपीट और छेड़छाड़ हुई, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उसे न्याय नहीं मिला। इसी हताशा में वह न्याय की गुहार लगाने मुख्यमंत्री आवास तक पहुंच गई।
थाने में मारपीट-छेड़छाड़ का आरोप
सरजू यादव का आरोप है कि ट्रांस यमुना थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष रोहित गुर्जर (वर्तमान में एमएम गेट थानाध्यक्ष) और अन्य पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट व छेड़छाड़ की। महिला का कहना है कि घटना के समय ही उसने चेतावनी दी थी कि यदि उसे न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेगी, लेकिन उसकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
चोरी के मुकदमे से शुरू हुआ विवाद
पीड़िता अपने पति त्रिभुवन सिंह यादव के साथ कालिंदी विहार स्थित सेंट हेनरी पब्लिक स्कूल के सामने रहती है। 15 सितंबर 2024 को दंपति घर पर ताला लगाकर बाहर गए थे। लौटने पर घर से 80 हजार रुपये नकद और आभूषण चोरी हो चुके थे। अगले दिन ट्रांस यमुना थाने में चोरी का मुकदमा दर्ज कराया गया।
महिला का आरोप है कि वह अपने ही मुकदमे की प्रगति जानने थाने गई थी, तभी उसे बताया गया कि जनवरी में एफआर लग चुकी है, जबकि न तो चोर पकड़ा गया था और न ही सामान बरामद हुआ था। इसी को लेकर सवाल-जवाब के दौरान विवाद बढ़ गया।
वायरल वीडियो और हाथापाई
घटना से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें महिला थाने के भीतर रोते हुए न्याय की गुहार लगाती और पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाती दिखी। एक वीडियो में महिला की आंख के पास चोट के निशान भी दिखाई दिए। अन्य वीडियो में महिला और महिला दरोगा के बीच बहस व हाथापाई के दृश्य सामने आए।
महिला का आरोप है कि इसी दौरान एक पुरुष पुलिसकर्मी ने उसे हाथ लगाया, जिससे वह और आक्रोशित हो गई और मामला मारपीट तक पहुंच गया।
सीएम आवास पहुंचकर आत्मदाह की कोशिश
लगातार देरी और कार्रवाई न होने से निराश होकर सरजू यादव लखनऊ पहुंची और मुख्यमंत्री आवास के पास आत्मदाह का प्रयास किया। मौके पर मौजूद पुलिस ने समय रहते उसे रोक लिया। इस दौरान महिला बार-बार यह कहती रही कि आगरा पुलिस उसे न्याय नहीं दे रही है।
जांच जारी, एसीपी कर रहे जांच
सरजू यादव द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच हिमांशु गौरव (एसीपी) कर रहे हैं। इस संबंध में एसीपी हिमांशु गौरव का कहना है कि मामले की जांच जारी है। जांच में हो रही देरी से ही महिला मानसिक रूप से क्षुब्ध थी और उसे आशंका हो गई थी कि दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।
महिला की मांग है कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ छेड़छाड़ और मारपीट का मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए। यह मामला एक बार फिर पुलिस पर लगे आरोपों में पीड़ित को न्याय मिलने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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