आगरा। जब खाकी संवेदना की चादर ओढ़ लेती है, तब वह केवल कानून की निगहबान नहीं रहती, बल्कि टूटते जीवन की ढाल बन जाती है। आगरा में पुलिस ने इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने हर संवेदनशील दिल को छू लिया। थाना लोहामंडी क्षेत्र में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में एक पेंटर की मौत के बाद उजड़े परिवार को पुलिस ने सहारा देकर यह साबित कर दिया कि वर्दी के भीतर धड़कता दिल भी होता है.
हादसे ने छीना सहारा, पुलिस बनी संबल
हादसे में पिता को खो चुके 14 वर्षीय बालक और उसके वृद्ध दादा की स्थिति सामने आते ही लोहामंडी थाना पुलिस ने मानवीय पहल की। बालक की मां का पहले ही देहांत हो चुका था। पिता की असमय मौत ने बच्चे को पूरी तरह अनाथ कर दिया। इस पीड़ा को समझते हुए इंस्पेक्टर उत्तम चंद्र पटेल और उनकी टीम ने संवेदना को कार्रवाई में बदला।
संवेदना से आगे बढ़ी पुलिस, निभाया इंसानियत का फर्ज
परिवार की व्यथा सुनकर पुलिसकर्मी भावुक हो उठे। उन्होंने केवल दिलासा ही नहीं दिया, बल्कि अंतिम संस्कार की व्यवस्था से लेकर भोजन, दवाइयों और बच्चे की पढ़ाई तक की जिम्मेदारी अपने हाथों में ले ली। थाने के हर कर्मचारी ने आगे बढ़कर परिवार का सहारा बनने का संकल्प लिया।
थाने ने अपनाया परिवार, भविष्य की जिम्मेदारी ली
लोहामंडी थाना पुलिस ने दादा-पोते को प्रतीकात्मक रूप से अपनाकर यह संदेश दिया कि पुलिस समाज के दुख-दर्द में भी साथ खड़ी रहती है। बच्चे के भविष्य को लेकर पुलिस ने गंभीरता दिखाई और उसकी शिक्षा व देखभाल में कोई कमी न आने देने का भरोसा दिलाया।
खाकी का मानवीय चेहरा
यह कहानी सिर्फ एक हादसे की नहीं, बल्कि उस भरोसे की है जब कानून के रक्षक सामाजिक जिम्मेदारी निभाने आगे आते हैं। माता-पिता दोनों को खो चुके बच्चे के लिए पुलिस का यह अपनापन जीवन भर की ताकत बन गया है।
आगरा पुलिस की यह पहल बताती है कि खाकी केवल सख्ती की पहचान नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर संवेदना, सेवा और सामाजिक दायित्व का मजबूत प्रतीक भी है।
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