Agra News: उद्योग–श्रमिक मुद्दों पर चैम्बर और श्रम विभाग का संवाद, पारदर्शी जांच व संवाद आधारित समाधान पर सहमति

PRESS RELEASE

आगरा। उद्योगों और श्रमिकों से जुड़े जमीनी मुद्दों, फर्जी शिकायतों से होने वाले उत्पीड़न, बाल श्रम मामलों की जांच प्रक्रिया और नए श्रम कानूनों के क्रियान्वयन को लेकर मंगलवार को नेशनल चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज तथा श्रम विभाग के बीच एक अहम संवाद हुआ। बैठक में पारदर्शी जांच, संवाद आधारित समाधान और श्रमिक कल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सहमति बनी।

चैम्बर सभागार में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता चैम्बर अध्यक्ष संजय गोयल ने की, जबकि पूर्व अध्यक्ष एवं श्रम कल्याण प्रकोष्ठ के चेयरमैन श्रीकिशन गोयल के नेतृत्व में उपश्रमायुक्त आगरा मंडल सियाराम तथा श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान श्रम कल्याण प्रकोष्ठ की ओर से 12 सूत्रीय प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।

चैम्बर अध्यक्ष संजय गोयल ने कहा कि किसी उद्योग में बाल श्रमिक होने की सूचना मिलने पर जब तक जन्म प्रमाणपत्र या विद्यालय प्रमाणपत्र से आयु का सत्यापन न हो जाए, तब तक कारखाना स्वामी के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल कुछ ट्रेड यूनियनों या एनजीओ की मिथ्या शिकायतों के आधार पर बाल श्रम उन्मूलन अधिनियम के तहत कार्रवाई करना अनुचित है। साथ ही उन्होंने एनजीओ को कारखानों में जांच के लिए भेजे जाने पर भी सवाल उठाए।

इस पर उपश्रमायुक्त सियाराम ने स्पष्ट किया कि विभागीय जांच के दौरान यदि आयु संबंधी वैध दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए जाते हैं, तो किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती।

बैठक में उपश्रमायुक्त ने उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। इनमें मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना, संत रविदास शिक्षा प्रोत्साहन योजना, अटल आवासीय विद्यालय योजना, कौशल विकास एवं तकनीकी उन्नयन योजना, कन्या विवाह सहायता, आपदा राहत, महात्मा गांधी पेंशन योजना, गंभीर बीमारी सहायता तथा निर्माण कामगार मृत्यु एवं दिव्यांगता सहायता योजना शामिल हैं।

नए श्रम कानूनों पर जानकारी देते हुए बताया गया कि केंद्र सरकार ने श्रम नियमावली को चार कोड में वर्गीकृत किया है। इनमें मजदूरी संहिता-2019, औद्योगिक संबंध संहिता-2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता-2020 और उपजीविका सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता-2020 शामिल हैं, जिन पर चरणबद्ध रूप से कार्य प्रगति पर है।

श्रम कल्याण प्रकोष्ठ के चेयरमैन श्रीकिशन गोयल ने कहा कि तथाकथित श्रमिक संगठनों द्वारा निजी स्वार्थ के तहत की जाने वाली फर्जी शिकायतों से उद्यमियों का अनावश्यक उत्पीड़न होता है। उन्होंने मांग की कि बिना ठोस साक्ष्य के ऐसी शिकायतों पर संज्ञान न लिया जाए और अपंजीकृत यूनियनों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की जांच केवल संबंधित शिकायत तक सीमित रखने के निर्देश दिए जाएं।

इस पर उपश्रमायुक्त सियाराम ने आश्वासन दिया कि शिकायतों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर वार्ता और संवाद के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण से 15 दिन पूर्व चैम्बर को सूचना देने, श्रम प्रवर्तन अधिकारियों की क्षेत्रवार सूची उपलब्ध कराने तथा उसमें होने वाले परिवर्तनों से समय-समय पर अवगत कराने का भरोसा भी दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में आठ श्रम प्रवर्तन अधिकारी कार्यरत हैं।

भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम के अंतर्गत देय उपकर की जांच को लेकर चैम्बर ने आग्रह किया कि भवन स्वामी की अनुपस्थिति में अन्य अधिनियमों की जांच न की जाए। इस पर भी उपश्रमायुक्त ने सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

बैठक में चैम्बर के पूर्व अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल, अमर मित्तल, अशोक कुमार गोयल, मुकेश अग्रवाल, अतुल कुमार गुप्ता, राजीव अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में चैम्बर सदस्य उपस्थित रहे।

Dr. Bhanu Pratap Singh