आगरा। चंबल नदी के तट पर घटित एक साहसिक और हृदयस्पर्शी घटना ने पूरे देश का ध्यान आगरा के एक नाबालिग बालक की ओर खींच लिया। पिता की जान बचाने के लिए मगरमच्छ से भिड़ जाने वाले किसान पुत्र अजयराज को देश की प्रथम नागरिक द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित कर सम्मानित किया। अजयराज की बहादुरी आज साहस, कर्तव्य और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक बन चुकी है।
चंबल नदी में हुआ था खौफनाक हादसा
यह घटना इसी वर्ष जुलाई माह की है। आगरा जिले के झरनापुरा हरलालपुर निवासी किसान वीरभान चंबल नदी से पानी लेने गए थे। तभी अचानक एक मगरमच्छ ने उनके पैर को अपने जबड़े में जकड़ लिया और उन्हें पानी के भीतर खींचने लगा। कुछ ही पलों में स्थिति जानलेवा हो गई।
नाबालिग बेटे ने दिखाई अदम्य हिम्मत
नदी किनारे मौजूद वीरभान का नाबालिग बेटा अजयराज पिता की चीख सुनते ही बिना किसी भय के बबूल का डंडा उठाकर नदी में कूद पड़ा। अजयराज ने मगरमच्छ पर लगातार प्रहार किए। उसकी निर्भीकता और साहस के आगे मगरमच्छ को हार माननी पड़ी और उसने वीरभान का पैर छोड़ दिया। हालांकि वीरभान के पैर में गंभीर चोटें आईं, लेकिन बेटे की सूझबूझ और साहस से उनकी जान बच गई।
दिल्ली तक पहुंची बहादुरी की गूंज
इस घटना के बाद अजयराज की बहादुरी के किस्से गांव से निकलकर क्षेत्र, जिला, प्रदेश और राजधानी दिल्ली तक पहुंचे। हर स्तर पर लोगों ने इस नाबालिग की साहसिक पहल को सलाम किया।
राष्ट्रपति भवन में मिला सम्मान
अजयराज के अद्वितीय साहस से प्रभावित होकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उसे राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया। इस सम्मान से न केवल अजयराज, बल्कि उसका परिवार और पूरा आगरा जिला गौरवान्वित हुआ है। यह सम्मान देश के युवाओं के लिए संदेश है कि संकट की घड़ी में साहस और कर्तव्यबोध असंभव को भी संभव बना सकता
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