बीटेक-एमटेक के बाद अब प्रशासनिक सेवा: आगरा की काव्या सिंह ने पहले ही प्रयास में पूरा किया अफसर बनने का सपना

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आगरा। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) 2024 के नतीजों ने ताजनगरी को गौरवान्वित कर दिया है। रविवार देर रात जारी हुए परिणाम में आगरा की चार बेटियों और जगनेर के एक लाल ने अपनी मेधा का लोहा मनवाते हुए प्रतिष्ठित पीसीएस परीक्षा में सफलता हासिल की है। इस कामयाबी ने साबित कर दिया है कि लगन और परिश्रम के दम पर ताजनगरी की बेटियां आसमान छूने को तैयार हैं।

​न्यायिक परिसर में गूँजी शहनाइयां: जज की बेटी बनी अफसर

​सफलता की सबसे चर्चा में रहने वाली कहानी काव्या सिंह की है। काव्या आगरा के विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) और अपर जिला जज कुंदन किशोर सिंह की सुपुत्री हैं। जैसे ही चयन सूची में काव्या का नाम चमका, जज कंपाउंड में बधाई देने वालों का तांता लग गया। भावुक पिता कुंदन किशोर ने कहा कि आज बेटियों ने हर क्षेत्र में परचम लहराकर खुद को साबित किया है। माँ शशि लता की आँखें भी खुशी से नम हो गईं, जिन्होंने हमेशा अपनी बेटी को अव्वल रहने के लिए प्रेरित किया।

शिक्षा का सफर: बीटेक-एमटेक से प्रशासनिक सेवा तक

काव्या सिंह की शैक्षणिक यात्रा काफी शानदार रही है। उन्होंने सेंट पैट्रिक्स स्कूल, आगरा से इंटरमीडिएट करने के बाद गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी से बीटेक और एमटेक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने मेरठ यूनिवर्सिटी से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। तकनीक और कानून की पढ़ाई के बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा को अपना लक्ष्य बनाया और कड़ी मेहनत से मुकाम हासिल किया। काव्या की छोटी बहन परिधि भी सिविल सेवा की तैयारी कर रही हैं, जबकि भाई दिव्यांश भी पढ़ाई में अव्वल हैं।

जगनेर के हरिविंदर और शहर की अन्य प्रतिभाएं

बेटियों के साथ-साथ बेटों ने भी जिले का मान बढ़ाया है। जगनेर निवासी हरविंदर सिंह गुर्जर का चयन होने पर पूरे गांव में जश्न का माहौल है। उनके पिता प्रेम सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। उनके अनुसार बेटे की यह मेहनत पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा है।

​इसके अलावा, आगरा शहर के अन्य इलाकों से भी खुशियां सामने आई हैं शास्त्रीपुरम की जैस्मिन वर्मा ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बेलनगंज की वैष्णवी शर्मा के घर में भी जश्न का माहौल है। दयालबाग की हिमिका ने भी सफलता की सूची में अपना नाम दर्ज कराया है।

​इन सभी मेधावियों ने प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की कठिन बाधाओं को पार कर 947 पदों की दौड़ में अपनी जगह पक्की की है। आगरा की इन प्रतिभाओं ने एक बार फिर दिखा दिया है कि सही दिशा और दृढ़ संकल्प हो तो कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता।

Dr. Bhanu Pratap Singh