भारत में पहले बड़ी नाक वाले ट्रकों का राज था. इनका बोनट काफी बड़ा होता था और गांव से लेकर शहर तक बस इनका ही बोलबाला था. हालांकि, समय बदला और अब नुकीले बंपर वाले ट्रकों की जगह सपाट डिजाइन वाले ट्रकों ने ली. अब तो मुश्किल से ही बड़े बोनट वाले ट्रक नजर आते हैं. मगर ऐसा क्या हुआ जो बड़ी नाक वाले ट्रकों का क्रेज घटता गया और कैब-ओवर ट्रक यानी सपाट बॉडी वाले ट्रकों का इस्तेमाल बढ़ गया? इस आर्टिकल में हम इसी बात को जानने की कोशिश करेंगे.
सालों तक बड़े बोनट वाले ट्रकों ने भारत की सड़कों पर राज किया. बड़े डिजाइन और लंबे फन के साथ, वे पावर और पॉरफॉर्मेंस के प्रतीक थे. जब ये ट्रक देश के एक कोने से दूसरे कोने तक सामान ले जाते हुए संकरी गलियों और ऊबड़-खाबड़ इलाकों से होकर गुजरते थे तो इनकी भव्यता देखते ही बनती थी.
ऊपर से ड्राइवर ट्रकों को सजाने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे. समय बीतने के साथ एक बदलाव आना शुरू हुआ – एक ऐसा बदलाव जिसने भारत में ट्रक के कल्चर को बदल दिया.
पुराने और नए ट्रक के बीच फर्क
इन दो प्रकार के ट्रकों के बीच सबसे बड़ा फर्क इनके डिजाइन में है. बड़े बोनट वाले ट्रक में ड्राइवर के केबिन के सामने स्थित एक इंजन कम्पार्टमेंट होता है, जिसमें इंजन का पूरा तामझाम होता है. ऐसे ट्रकों को आम भाषा में लंबी नाक या नुकीले बंपर वाला ट्रक भी कहा जाता है.
नए ट्रकों में ड्राइवर केबिन के नीचे इंजन होता है, जबकि पुराने ट्रक में केबिन के सामने इंजन होता है.
दूसरी तरफ कैब-ओवर ट्रक, जिन्हें फ्लैट-नोज्ड या फॉरवर्ड कंट्रोल ट्रक भी कहा जाता है, उनका केबिन सीधे इंजन के ऊपर होता है. इसकी वजह से ट्रक की बॉडी काफी कॉम्पैक्ट और कंफर्टेबल होती है. इन्हें सपाट ट्रक के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इनकी बॉडी आगे से बिलकुल सपाट होती है.
एक्सीडेंट से बचाव होता है
भारत में सपाट डिजाइन वाले ट्रकों की लोकप्रियता में इजाफे की वजह उनकी बेहतर आवाजाही है. ऐसे देश में जहां सड़कें अक्सर संकरी और भीड़भाड़ वाली होती हैं, तंग जगहों पर भी ये ट्रक आसानी से चले जाते हैं. अपने कैब-ओवर डिजाइन के साथ ये ट्रक ड्राइवरों को सामने का बिलकुल साफ नजारा दिखाते हैं. बड़ी नाक वाले ट्रकों में आगे बंपर की वजह से सामने देखने में थोड़ी परेशानी होती है.
इससे सपाट बॉडी वाले ट्रक भीड़-भाड़ वाली सड़कों और तीखे मोड़ों पर आत्मविश्वास के साथ चल सकते हैं. इससे ना केवल आवाजाही सुधरती है बल्कि एक्सीडेंट के रिस्क को भी कम करती है, जिससे कैब-ओवर ट्रक कई बेड़े ऑपरेटरों के लिए पसंदीदा ऑप्शन बन चुके हैं. इसके अलावा ट्रक का साइज भी एक बड़ा कारण है.
मॉडर्न ट्रक में ज्यादा लोडिंग क्षमता
सरकार ने ट्रकों के लिए जो लंबाई निर्धारित की है, उसके तहत नाक वाले ट्रक में बंपर के लिए ही काफी जगह चाहिए. मगर मॉडर्न ट्रकों में आगे से सपाट बॉडी होने की वजह से तय साइज का बेहतर तरीके से इस्तेमाल होता है. बोनट वाले ट्रकों की तुलना में ये आपको ज्यादा लोडिंग क्षमता की सुविधा देते हैं.
हालांकि, बड़े-बोनट से कैब-ओवर ट्रकों में बदलाव आना चुनौतियों से छुटकारा नहीं दिलाता है. कई ड्राइवर जो पुराने जमाने के ट्रकों के पहिए के पीछे बड़े हुए हैं, उनके लिए कैब-ओवर मॉडल में बदलाव माथे पर शिकन पैदा करता है.
कुछ लोग बोनट ट्रक के कम होते इस्तेमाल को बड़े नुकसान के तौर पर देखते हैं. इसे परंपरा और विरासत के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है. बहरहाल, कैब-ओवर ट्रकों के फायदे, कमियों से ज्यादा हैं, इसलिए ट्रक ऑपरेटर्स इन्हें अपनाया है.
-एजेंसी
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