नारनौल। मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा द्वारा वीर बाल-दिवस के उपलक्ष्य में वर्चुअल अंतरराष्ट्रीय बालकाव्य-सम्मेलन का आयोजन आज किया गया, जिसमें एक दर्जन देशों के पंद्रह कवियों ने बालकाव्य-पाठ किया। डॉ. कांता भारती द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना-गीत के उपरांत प्रगीत कुंअर के कुशल संचालन और गृह मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के सहायक निदेशक रघुवीर शर्मा की अध्यक्षता में लगभग डेढ़ घंटे तक चले इस कवि-सम्मेलन में नेपाल के पूर्व कृषि मंत्री और वरिष्ठ साहित्यकार त्रिलोचन ढकाल मुख्य अतिथि थे तथा विश्व बैंक, वाशिंगटन डीसी (अमेरिका) की वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ. एस अनुकृति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
सिक्खों के 10वें गुरु गोविंद सिंह के पुत्रों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व के ज्ञात इतिहास में बच्चों के त्याग और बलिदान का ऐसा कोई अन्य उदाहरण नहीं मिलता। इससे पूर्व चीफ ट्रस्टी डॉ. रामनिवास ‘मानव’ ने चारों गुरुपुत्रों का परिचय प्रस्तुत कर उनके बलिदान के महत्त्व को रेखांकित किया।
इस अवसर पर टोक्यो (जापान) की डॉ. रमा पूर्णिमा शर्मा ने ‘बच्चे सच्चे-अच्छे’, सिडनी (आस्ट्रेलिया) के प्रगीत कुंअर ने ‘बचपन का मतलब’ और डॉ. भावना कुंअर ने ‘दादी का गांव’, दोहा (कतर) की डॉ. मीनू शर्मा ‘मानसी’ ने ‘दोस्ती की मिठास’, वाक्वा माॅरीशस की कल्पना लालजी ने ‘कहां गये वे बच्चे?’, सोफिया (बुल्गारिया) की डॉ. मोना कौशिक ने ‘देश’, कोलोन (जर्मनी) की डॉ. शिप्रा शिल्पी ने ‘नन्हें सैनिक’, आसन (नीदरलैंड) की डॉ. ऋतु शर्मा ने ‘नई कहानी’, स्टाॅकहोम (स्वीडन) के सुरेश पांडे ने ‘सड़क’, वर्जीनिया (अमेरिका) की मंजू श्रीवास्तव ने ‘लस्सी या पैप्सी’ तथा भारत से लखनऊ के डॉ. रामवृक्ष सिंह ने ‘धमाचौकड़ी’, मथुरा के डॉ. अंजीव अंजुम ने ‘फूल हैं बगिया के’, रायपुर के डॉ. सत्यनारायण ‘सत्य’ ने ‘सर्दी’, हिसार के डाॅ. सत्यवान सौरभ ने ‘ठंड हुई पुरजोर’ तथा नारनौल के डाॅ. रामनिवास ‘मानव’ ने ‘मत घबराना’ शीर्षक बालगीतों और बाल-कविताओं का पाठ किया, जिन्हें श्रोताओं की भरपूर सराहना मिली।
समारोह में प्रो. सिद्धार्थ रामलिंगम (वाशिंगटन डीसी, अमेरिका), हरमहेंद्रसिंह यादव (टोरंटो, कनाडा), धनभद्र लपसिरिकुल (बैंकाक, थाईलैंड), डॉ. मोनिका सैनी (पचेरी बड़ी), सुरेश मुनि (चंडीगढ़), प्रियंका सौरभ (हिसार), मुकुट अग्रवाल (रेवाड़ी), डॉ. पंकज गौड़, डॉ. जितेंद्र भारद्वाज, डॉ. शर्मीला यादव, सुरेंद्र यादव, एडवोकेट और हिमांशु जर्नलिस्ट (नारनौल) की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
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