नई दिल्ली: विशेष सत्र के दौरान, कैबिनेट ने महिला आरक्षण बिल को मंजूरी देने का निर्णय लिया है। इस बिल को लेकर विभिन्न राय और सवाल उठ रहे थे, लेकिन कैबिनेट ने इसे स्वीकार कर लिया है। इसके पश्चात्, क्या महिला आरक्षण बिल को लोकसभा में पेश किया जाएगा, यह अब देखा जा रहा है।
यह महिला आरक्षण विधेयक लगभग 27 सालों से संविधान की राह में था, और अब यह आखिरकार संसद के प्रमुख मांगों में आया है। लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या अब भी केवल 15% से कम है, और राज्य विधानसभा में भी उनका प्रतिनिधित्व 10% से भी कम है।
महिला आरक्षण के इस मुद्दे पर पहली बार बहस 2010 में हुई थी, जब राज्यसभा ने एक बिल को पास कर दिया था, लेकिन इसे लोकसभा में पारित नहीं किया जा सका था, इसलिए यह रद्द हो गया था। इस बिल का समर्थन बीजेपी और कांग्रेस द्वारा हमेशा किया गया है, लेकिन कुछ अन्य दलों ने महिला कोटा के भीतर ओबीसी आरक्षण की कुछ मांगों को लेकर इसका विरोध किया था। इसके बाद, इस विशेष सत्र में कई दलों ने महिला आरक्षण बिल को लाने और पारित करने की महत्वपूर्ण बात की, और अब सरकार ने इसे मंजूर कर दिया है।
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