नई दिल्ली। नया नियम लागू होने से कुछ ब्रांड्स की गाडियां महंगी हो गई हैं। पहले से तय समय के अनुसार बीते 1 अप्रैल 2023 को देश में नए रियल ड्राइविंग इमिशन नॉर्म्स (आरडीई) अर्थात बीएस6 फेज़-2 को लागू कर दिया गया। ये नया नियम वाहनों से होने वाले प्रदूषण की निगरानी करने के लिए लागू किया गया है, लेकिन इसका गहरा असर ऑटो सेक्टर और आम लोगों की जेब पर भी पढ़ रहा है। नए उत्सर्जन नियमों के चलते जहां वाहन निर्माताओं को अपने वाहनों को अपडेट करना पड़ा है वहीं कारों की कीमत में भी इजाफा हुआ है।
इतना ही नहीं मारुति सुजुकी ऑल्टो 800 और होंडा जैज जैसे कई कारों को बाजार से अपना बोरिया बिस्तर भी लपेटना पड़ा है। भारत स्टेज 6 यानी कि बीएस 6 को साल 2020 में लागू किया गया था, इसके बाद अब नए आरडीई नॉर्म्स को लागू कर दिया गया है। नया आरडीई नॉर्म्स मूल रूप से भारत में पहले से लागू बीएस 6 नॉर्म्स का दूसरा चरण है। आरडीई को पहली बार यूरोप में लागू किया गया था। इस नए नियम के तहत वाहन निर्माता कंपनियों को वास्तविक परिस्थितियों में उत्सर्जन मानकों को पूरा करने की आवश्यकता होती है।
नए आरडीई नियम के लिए आवश्यक है कि वाहनों में रीयल-टाइम ड्राइविंग उत्सर्जन स्तरों की निगरानी के लिए ऑनबोर्ड सेल्फ-डायग्नोस्टिक डिवाइस दिए गए हों। उत्सर्जन पर कड़ी नजर रखने और उत्सर्जन मानकों को पूरा करने के लिए ये डिवाइस उत्प्रेरक कनवर्टर और ऑक्सीजन सेंसर जैसे प्रमुख हिस्सों की लगातार निगरानी करेगा।
दरअसल, RDE रियल लाइफ में वाहनों द्वारा उत्पन्न किए जाने वाले प्रदूषकों को मापता है, जिसके परिणामस्वरूप बेहतर अनुपालन होता है। यहां तक कि वाहनों में इस्तेमाल किए जाने वाले सेमीकंडक्टर को भी थ्रॉटल, क्रैंकशाफ्ट की स्थिति, एयर इंटेक प्रेशर, इंजन के तापमान और उत्सर्जन के दौरान बाहर निमलने वाले मैटीरियल (पार्टिकुलेट मैटर, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सीओ2, सल्फर), आदि की निगरानी के लिए अपग्रेड करना होगा। इसके अलावा, वाहनों में प्रोग्रॉम्ड फ्यूल इंजेक्टर को भी शामिल किए जाने होंगे।
वाहनों को पूरी तरह से इस नियम के तहत तैयार करने के लिए कंपनियों को वाहनों के इंजन को अपग्रेड करना होगा। ये बदलाव इतने आसान भी नहीं है, और इसका सीधा असर वाहनों के निर्माण पर पड़ने वाले खर्च पर भी देखने को मिल रहा है, यही कारण है कि, वाहनों की कीमत में इजाफा देखने को मिल रहा है।
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