सुशील जैन ने कहा- राजकुमार भाई को ठीक करने में छह माह लगेंगे
साध्वी जी के प्रवचन लगातार सुनो तो दीक्षा का भाव, इसीलिए रोज नहीं आता
डॉ. भानु प्रताप सिंह
श्वेतवस्त्रधारी। कुशल प्रवचनकार। कोकिलाकंठ। हर विषय का ज्ञान। मुखमंडल पर तैरती रहती मुस्कान। जैन धर्म की विकिपीडिया। सूक्ष्म से सूक्ष्म जानकारी। साध्वी पर सांसारिक बातों से भिज्ञ। अगर इनकी संगत में कोई दो-तीन माह रह ले तो जैन साधु बन जाए। ऐसी हैं जैन साध्वी वैराग्य निधि। जैन श्रावक उन्हें श्रद्धा से ‘महाराज साहब’ कहते हैं। वाकई परमविदुषी हैं। साथ ही वे बड़ी ‘खतरनाक’ भी हैं।
हम सब जानते हैं कि जैन संतों की दिनचर्या कठोर नियमों के अंतर्गत चलती है। जैन संत पैदल विहार करते हैं। चाहे सड़क धूप में तप रही हो, मार्ग कंटकाकीर्ण हो या पुष्पित हो। चलना पैदल ही है। जैन संत जल और अन्न का प्रयोग एक बार ही करते हैं। फिर भी न थकते हैं, न रुकते हैं, न आलस्य आता है और न ही कोई पथ से विचलित कर पाता है। उन्हें किसी सम्मान की चाह नहीं होती है। हर वक्त धर्म के प्रचार-प्रसार में रत रहते हैं। उनका यह त्याग अतुलनीय और वंदनीय है। इसी त्याग के कारण वे महाराज साहब हैं।
जैन साध्वी वैराग्य निधि महाराज आजकल जैन तीर्थस्थल दादाबाड़ी, शाहगंज, आगरा में चातुर्मास कर रही हैं। उनकी वाणी में इतना माधुर्य और आकर्षण है कि हर कोई खिंचा चला आता है। दादाबाड़ी में यूं तो बहुत से संतों ने चातुर्मास किया है, लेकिन इस बार बात ही निराली है। जैन साध्वी का प्रवचन सुनने के लिए श्रावक और श्राविकाएं बेताब रहते हैं।

बाएं से जयणा श्री जी, वैराग्य निधि श्री जी, ऋतुमना श्री जी।
वैराग्य निधि महाराज से मिलने के लिए पूरे देश से श्रावक आ रहे हैं। उन्होंने जहां-जहां चातुर्मास किया है, वहां के लोग आ रहे हैं। साध्वी जी उन सबसे अत्यंत प्रेम के साथ मिलती हैं। उनके नाम के साथ ‘भाई’ लगती हैं, सबके नाम के साथ ‘जी’ लगती हैं। सबको नाम से पुकारती हैं। उनका यहां किसी से कोई सांसारिक रिश्ता नहीं है लेकिन उन्होंने सबको अपना बना लिया है। वे सबकी गुरु महाराज हैं।
इस बार के चातुर्मास में खास बात यह है कि साध्वी जी ने जैन श्रावक और श्राविकाओं को धार्मिक क्रियाकलापों से जोड़ा है। मंदिर जी में नियमित पूजा, ध्यान, तपस्या का व्रत दिलाया है। उनकी प्रेरणा से सैकड़ों लोग रात्रि भोजन का त्याग कर चुके हैं। 31 दिन तक सिर्फ पानी पीकर तपस्या की गई है। 16 दिन की तपस्या तो आम बात है।

अब मैं आपको बताता हूँ कि वे बड़ी खतरनाक क्यों हैं? साध्वी जी को सबसे पहले खतरनाक बताया लोहामंडी संघ के सुशील जैन ने। वे दो नवम्बर के कार्यक्रम में चलने की अनुमति मांगने आए थे। इसी दौरान उन्होंने साध्वी जी को खतरनाक बताया था। जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के अध्यक्ष राजकुमार जैन की ओर इशारा करते हुए कहा था कि साध्वी जी ने हमारे राजुकमार भाई को बिगाड़ दिया है। ऐसा लगता है कि वे कभी भी दीक्षा ले सकते हैं। इन्हें सुधारने में कम से कम छह महीने लगेंगे। मैं भी साध्वी जी के प्रवचनों में रोज इसी कारण नहीं आ रहा हूँ कि पता नहीं कब दीक्षा का भाव पैदा हो जाए। मैं गृहस्थ हूँ, इसलिए इस जन्म में तो नहीं लेकिन अगले जन्म में जरूर दीक्षा का भाव है।
आपको बता दूं कि श्री राजकुमार जैन फुटवियर इंडस्ट्री से ताल्लुक रखते हैं। वे आगरा विकास मंच के संस्थापक अध्यक्ष स्व. अशोक जैन सीए के अनुज हैं। जूता निर्यातक दो कंपनियों के सीएमडी (अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक) हैं। करोड़ों का कारोबार है। वे साध्वी जी के प्रवचन में नियमित जा रहे हैं। इस कारण बातें भी वीतरागियों जैसी करने लगे हैं। एक बार मैंने उनसे फोन पर कहा कि आप जैसी समाजसेवा कोई नहीं कर सकता तो कहने लगे कि इस तरह की बातें न करें, दिमाग खराब होता है। अच्छा रहेगा आप हमारी कमियां बताया करें। हालांकि वे पहले से ही सहज और सरल हैं, लेकिन साध्वी वैराग्य निधि की संगत में आने के बाद यह सरलता कई गुणा बढ़ गई है। ऐसा लगता है कि वे सांसारिक मोह माया के बंधनों को तोड़ने के लिए छटपटा रहे हैं। उनकी पत्नी ममता जैन भी उन्हीं की हमराह हैं। सबको भय सता रहा है कि कहीं राजकुमार जैन और उनकी पत्नी ममता जैन दीक्षा लेकर साधु न बन जाएं।
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