आराम पसंद लाइफस्टाइल और फैटी फूड से दिल के रोगों का ही नहीं, डीवीटी यानी डीप वीन थ्रॉम्बोसिस का खतरा भी बढ़ रहा है। डीवीटी शरीर की गहराई में खून का थक्का बन जाने को कहते हैं। इस तरह के थक्के पिंडलियों, जांघों, किडनी, दिमाग, आंतों और लिवर में बन सकते हैं। इस खतरे की चपेट में अब सिर्फ बुजुर्ग या किसी कारण से चल फिर न पाने वाले ही नहीं बल्कि युवा और बच्चे भी आने लगे हैं। कई बार जॉइंट रीप्लेसमेंट सर्जरी और गंभीर किस्म के एक्सीडेंट के मामलों में की जाने वाली सर्जरी के कारण भी फ्री हुए टिश्यू और फैट खून में मिल जाते हैं जो कि डीवीटी की वजह बनते हैं।
क्या होता है असर?
डीवीटी के कारण प्रभावित अंग में खून की सप्लाई पर असर पड़ने लगता है। इसके कारण दर्द, सूजन और प्रभावित अंग में भारीपन हो जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक डीवीटी में जो थक्के बनते हैं, उनके लंग्स में पहुंचने पर अचानक सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। ये अगर दिल या ब्रेन में पहुंच जाएं तो हार्ट अटैक या स्ट्रोक की वजह बन सकते हैं।
क्यों होती है डीवीटी की समस्या?
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व प्रेसीडेंट डॉ. बंसल कहते हैं कि ज्यादातर लोग आजकल शारीरिक श्रम नहीं करते। चलने-फिरने से भी उन्हें परहेज रहता है। यह भी डीवीटी यानी खून में थक्का बनने की वजह बन सकता है। इसके अलावा जंक फूड और तंबाकू आदि का सेवन भी इस समस्या को बढ़ा रहा है। इसके कारण युवा और बच्चे तक इसकी चपेट में आने लगे हैं।
यह है इलाज
डॉ. बंसल की राय है कि लोगों को अपनी लाइफ स्टाइल में सुधार करना चाहिए और खानपान में संयम बरतना चाहिए। अगर इसके बाद भी किसी कारण से डीवीटी की समस्या पैदा होती है तो उसे दवाओं और इंटरवेंशनल रेडियॉलजी की मदद से ठीक किया जा सकता है। एक्सीडेंट या सर्जरी के कारण होने वाले डीवीटी के मामलों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन लाइफस्टाइल के कारण पैदा हुई समस्या को हम रोक सकते हैं।
-एजेंसियां
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