अयोध्या: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक अयोध्या दौरे के दौरान उनके आवास पर पहुंचकर चाय पीने से देश भर में सुर्खियों में आईं मीरा मांझी की आर्थिक तंगी का मामला अब उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक बड़ा केंद्र बन गया है। विपक्षी दलों द्वारा परिवार के कर्ज में डूबने और दयनीय स्थिति का मुद्दा जोर-शोर से उठाए जाने के बाद सत्ता पक्ष भी सक्रिय हो गया है। इसी कड़ी में अयोध्या के महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी गुरुवार को सीधे कंधरापुर स्थित मीरा मांझी के आवास पर पहुंचे और परिवार से मिलकर उनका हालचाल जाना।
महापौर ने दी 60 हजार की मदद, मानी अपनी चूक
महापौर गिरीश पति त्रिपाठी ने पीड़ित परिवार से बातचीत कर उनकी जमीनी तकलीफों का जायजा लिया और व्यक्तिगत रूप से 60 हजार रुपये की नकद आर्थिक सहायता प्रदान की। इस दौरान महापौर ने पूरी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए स्वीकार किया कि बीते तीन-चार महीनों के भीतर व्यस्तताओं के चलते वे परिवार का कुशलक्षेम नहीं ले पाए, जो कि एक तरह से उनसे चूक रही।
उन्होंने परिवार को आश्वस्त किया कि उनकी सभी परेशानियों को प्राथमिकता से हल किया जाएगा। महापौर ने यहां तक कहा कि यदि बैंक लोन या अन्य किसी बड़ी आवश्यकता के लिए सरकारी मदद के अलावा और धन की जरूरत पड़ी, तो वे चंदा एकत्र करके भी परिवार की भरपूर सहायता करेंगे।
सरकारी योजनाओं का दिया जा रहा है लाभ: महापौर
स्थिति स्पष्ट करते हुए महापौर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन के बाद से ही मीरा मांझी के परिवार को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा गया है। परिवार के पास पक्का प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला योजना का गैस कनेक्शन और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड जैसी प्रमुख सुविधाएं पहले से मौजूद हैं।
उन्होंने बताया कि बैंक लोन की मासिक किस्तों के दबाव को कम करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर पहले भी राहत के प्रयास किए गए थे, और आगे भी परिवार को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
विपक्षी दलों के सक्रिय होने के बाद गरमाई सियासत
गौरतलब है कि मीरा मांझी के परिवार की माली हालत और कर्ज के बोझ का मुद्दा उस समय और गहरा गया था जब समाजवादी पार्टी के नेता व पूर्व मंत्री पवन पांडे ने उनके घर पहुंचकर 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी थी और सरकार पर तीखे तंज कसे थे। विपक्ष द्वारा लगातार सरकार को घेरे जाने के बाद महापौर की इस त्वरित सक्रियता और 60 हजार रुपये की वित्तीय सहायता ने इस पूरे प्रकरण को तूल दे दिया है।
लगातार मिल रहे राजनीतिक दौरों और दोनों पक्षों से प्राप्त आर्थिक मदद के बाद अब मीरा मांझी और उनके परिवार ने उम्मीद जताई है कि उनके सिर पर मंडरा रहा कर्ज का संकट आखिरकार दूर हो सकेगा और नेताओं द्वारा दिए गए वादे धरातल पर उतरेंगे।
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