संयुक्त राष्ट्र महासभा में गूंजी आगरा के सांसद नवीन जैन की आवाज: UNGA के 81वें सत्र में रखा भारत का पक्ष, वैश्विक व्यापार और कानूनी सुधारों पर दिया जोर

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न्यूयॉर्क/आगरा: राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की छठी समिति में भारत की ओर से एजेंडा मद 76 (संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार विधि आयोग) पर राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत किया। इस दौरान उन्होंने वैश्विक व्यापार, अंतरराष्ट्रीय कानूनी सुधारों, डिजिटल तकनीक और न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने वैश्विक व्यापार के लिए समावेशी, विकासोन्मुखी एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कानूनी ढांचे की आवश्यकता पर बल देते हुए इस दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

इस अंतरराष्ट्रीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व राज्यसभा सांसद नवीन जैन जी द्वारा किया जाना आगरा के लिए गौरव और सम्मान का विषय है। विश्व के सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंचों में से एक संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का पक्ष रखने और भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलना न केवल नवीन जैन जी की सक्रिय भूमिका को दर्शाता है, बल्कि समस्त आगरा वासियों के लिए भी गर्व का क्षण है। यह उपलब्धि आगरा की प्रतिष्ठा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाली है।

अपने वक्तव्य में नवीन जैन ने संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार विधि आयोग के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुगम बनाने, वाणिज्यिक विवादों के प्रभावी समाधान और कानूनी प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने में कानूनी ढांचे की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया। इस संदर्भ में उन्होंने मध्यस्थता, वाणिज्यिक विवादों के समाधान और दिवाला कानूनों से संबंधित भारत में किए गए घरेलू सुधारों को भी रेखांकित किया।

सांसद ने अंतरराष्ट्रीय निवेश विवाद सुधार के लिए सलाहकार केंद्र की स्थापना की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र की सेवाएं संबंधित देशों के लिए सुलभ हों और सदस्यता तथा वित्तीय दायित्वों के संबंध में स्पष्टता बनी रहे। उनके वक्तव्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादों के समाधान के लिए पारदर्शी, प्रभावी और सभी पक्षों के हितों का ध्यान रखने वाली व्यवस्था की आवश्यकता भी प्रमुख रही।

निवेशक और राज्य के बीच विवाद निपटान व्यवस्था में सुधार के विषय पर नवीन जैन ने राज्यों की सहमति, उनके नियमन के अधिकार और प्रक्रियात्मक निष्पक्षता का सम्मान करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भौगोलिक क्षेत्रों का न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की बात भी कही, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में विभिन्न देशों की परिस्थितियों और हितों को उचित स्थान मिल सके।

अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता व्यवस्था के आधुनिकीकरण का समर्थन करते हुए उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मध्यस्थता की प्रभावी मान्यता और प्रवर्तन को भी महत्वपूर्ण बताया। डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच उन्होंने व्यापारिक प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाने और विवाद निपटान की व्यवस्था को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर बल दिया।

नवीन जैन ने भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तंत्र और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 का उल्लेख करते हुए इन्हें व्यापार को सुगम बनाने तथा न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने दिवाला कानून, सार्वजनिक खरीद और डिजिटल परिसंपत्तियों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार विधि आयोग के कार्यों के महत्व को भी रेखांकित किया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था के विकास के साथ देशों की राष्ट्रीय नीतिगत स्वतंत्रता सुरक्षित रहनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रियाओं में सभी देशों की न्यायसंगत भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उनके वक्तव्य का प्रमुख केंद्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए ऐसा कानूनी ढांचा विकसित करने की आवश्यकता रहा, जो समावेशी हो और विभिन्न देशों के विकास संबंधी उद्देश्यों के अनुरूप हो।

महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमन

संयुक्त राष्ट्र महासभा से संबंधित महत्वपूर्ण बैठक से पूर्व न्यूयॉर्क में सांसद नवीन जैन ने भारतीय संसदीय दल के प्रतिनिधिमंडल के साथी सदस्यों के साथ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन कर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर 100 से अधिक देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों की सहभागिता के बीच महात्मा गांधी जी के सत्य, अहिंसा और शांति के शाश्वत आदर्शों का स्मरण किया गया।

महात्मा गांधी जी के विचारों को संपूर्ण मानवता की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनके सिद्धांतों को वैश्विक शांति, सह-अस्तित्व और आपसी सद्भाव के लिए प्रासंगिक बताया गया। सत्य और अहिंसा पर आधारित गांधी जी का दर्शन विभिन्न देशों और समाजों के बीच संवाद, सहयोग तथा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत करने का संदेश देता है। वर्तमान समय में जब विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब उनके विचार अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए शांति और सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण हैं हैं।

भारत की तरफ से प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों में सांसद अरुण गोविल जी, राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति जी, सांसद मनीष तिवारी जी, सांसद हेमंत विष्णु, सांसद डॉक्टर कल्पना सैनी, सांसद रंजीत रंजन सहित अन्य सांसद एवं प्रतिनिधिमंडलों के सदस्य शामिल रहे।

Dr. Bhanu Pratap Singh