यूपी में सरसों उत्पादन को 40 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य: कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने आगरा में की घोषणा

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आगरा: उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रदेश में कृषि क्षेत्र को नई दिशा और गति देने के लिए एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने घोषणा की है कि सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य में सरसों के उत्पादन को बढ़ाकर 40 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचाना है। बुधवार को आगरा के मंडलायुक्त सभागार में आयोजित आगरा, अलीगढ़ और बरेली मंडल की संयुक्त ‘राज्य स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी-2026’ के दौरान कृषि मंत्री ने किसानों से दलहन और तिलहन की खेती बड़े पैमाने पर करने, फसल विविधीकरण (Crop Diversification) अपनाने और खेतों में संतुलित उर्वरक का उपयोग करने की पुरजोर अपील की।

​विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के लिए कृषि का आत्मनिर्भर होना जरूरी

मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के विजन को साकार करने के लिए कृषि क्षेत्र का आत्मनिर्भर होना अत्यंत आवश्यक है। किसानों को केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय उत्पादन बढ़ाने, खेती की कुल लागत को कम करने और बाजार की मांग के अनुरूप फसलों का चयन करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। प्रदेश सरकार किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, समय पर सिंचाई सुविधाएं, उर्वरक और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर

कृषि मंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि देश में खाद्य तेलों और दलहन की मांग को पूरा करने के लिए आज भी आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। इस निर्भरता को खत्म करने के लिए सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और अन्य दलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ाना होगा। उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में सरसों का उत्पादन पहले करीब 10 लाख मीट्रिक टन था, जो बढ़कर अब 35 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है और अब इसे 40 लाख मीट्रिक टन तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके लिए किसानों को निःशुल्क बीज और अन्य प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।

इसके साथ ही, उन्होंने आलू की खेती करने वाले किसानों को बाजार की मांग और कीमतों के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक फसलों पर विचार करने की सलाह दी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गेहूं, जौ, चना और मसूर के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तथा सरकारी खरीद केंद्रों की पूरी जानकारी समय पर किसानों तक पहुंचाई जाए।

तीन साल में फसल सघनता 220 प्रतिशत करने का लक्ष्य

कृषि मंत्री ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश में लगभग 12 लाख क्विंटल बीज वितरण की पुख्ता योजना बनाई गई है। किसानों को बीज के मामले में आत्मनिर्भर और उत्पादक बनाने के लिए लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर एक अत्याधुनिक सीड पार्क विकसित किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य आगामी तीन वर्षों के भीतर प्रदेश की फसल सघनता (Crop Intensity) को बढ़ाकर 220 प्रतिशत तक ले जाना है, ताकि कृषि भूमि का अधिक से अधिक और प्रभावी उपयोग किया जा सके।

​उन्होंने किसानों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे मिट्टी की जांच के आधार पर ही डीएपी, एनपीके और यूरिया का संतुलित इस्तेमाल करें। साथ ही, खेतों में जैविक खाद और कंपोस्ट के प्रयोग को बढ़ावा दें, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो सके और खेती की लागत में कमी आए।

पशुपालन और कृषि अनुसंधान से बढ़ेगी किसानों की आय

खेती के साथ-साथ पशुपालन, डेयरी और दुग्ध प्रसंस्करण को किसानों की आमदनी बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम बताते हुए मंत्री ने कहा कि कृषि आधारित ग्रामीण उद्यम युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोल सकते हैं। उन्होंने वाराणसी स्थित अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय परिसर और आगरा में अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के दक्षिण एशियाई परिसर का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि वैज्ञानिकों के अनुसंधान का लाभ सीधे धरातल पर किसानों तक पहुंचना चाहिए। इससे नई व उन्नत किस्में विकसित होंगी और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा मिलेगा।

गोष्ठी के प्रारंभ में कृषि मंत्री ने प्रमुख सचिव कृषि एम.के. शन्मुगा सुन्दरम के साथ परिसर में लगाए गए कृषि मेलों और स्टालों का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को कृषि यंत्रों की चाबियां और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में प्रमुख सचिव कृषि एम.के. शन्मुगा सुन्दरम, कृषि निदेशक त्र्यंबक मणि त्रिपाठी, मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप, जिलाधिकारी मनीष बंसल सहित तीनों मंडलों के कृषि व उद्यान विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।

Dr. Bhanu Pratap Singh