आगरा। उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (DBRAU) में सोमवार को उस वक्त अफरा-तफरी और भारी तनाव का माहौल बन गया, जब बीए-एलएलबी प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम में कथित गड़बड़ी और बड़े पैमाने पर विद्यार्थियों के फेल होने से नाराज छात्र उग्र प्रदर्शन पर उतर आए। परीक्षा परिणामों से असंतुष्ट और आक्रोशित कई छात्र विरोध जताते हुए विश्वविद्यालय परिसर के अंदर ही बनी ऊंची पानी की टंकी पर जा चढ़े। छात्रों के इस नाटकीय और खतरनाक कदम से विश्वविद्यालय प्रशासन और सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। काफी लंबे समय से परीक्षा परिणामों में सुधार और विसंगतियों को दूर करने की मांग कर रहे इन विद्यार्थियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और रिजल्ट की उच्चस्तरीय जांच कराने की पुरजोर मांग उठाई।
छात्रों के सामने भविष्य और प्रवेश का संकट
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों का गंभीर आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले तो परीक्षा परिणाम घोषित करने में अनावश्यक रूप से भारी विलंब किया, जिससे उनकी आगे की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई। इसके बाद जब आखिरकार रिजल्ट जारी किया गया, तो उसमें बड़ी संख्या में छात्रों को फेल दर्शा दिया गया। इस स्थिति के कारण विद्यार्थियों के समक्ष आगामी कक्षाओं में प्रवेश लेने और अपने पूरे शैक्षणिक सत्र को लेकर गहरी अनिश्चितता और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
छात्रों का कहना है कि रिजल्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका को भांपते हुए उन्होंने पहले ही विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क किया था और लिखित शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन तमाम प्रयासों और चक्कर काटने के बावजूद उनकी समस्या का कोई भी संतोषजनक समाधान नहीं निकाला गया।
लगातार अनदेखी से बढ़ा विद्यार्थियों का गुस्सा
छात्रों का यह भी तर्क है कि परीक्षा परिणाम आने में हुई देरी ने पहले ही उनकी मानसिक चिंता बढ़ा दी थी, और ऊपर से उन्हें अनुत्तीर्ण (फेल) घोषित किए जाने से उनका रोष चरम पर पहुंच गया। विद्यार्थियों को इस बात का डर सता रहा है कि यदि इस कथित तकनीकी या मूल्यांकन त्रुटि का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो उनका एक पूरा साल बर्बाद हो सकता है। इसी अनसुनी और उपेक्षा से उपजे गुस्से के चलते छात्रों ने सोमवार को कड़ा रुख अपनाते हुए विश्वविद्यालय परिसर की पानी की टंकी पर चढ़ने का रास्ता चुना। इस घटनाक्रम के बाद से एक बार फिर विश्वविद्यालय की परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था कटघरे में खड़ी हो गई है।
जांच और परिणाम में सुधार की उठी मांग
छात्रों ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि उनके परीक्षा परिणामों की निष्पक्षता से दोबारा जांच कराई जाए। यदि कॉपियों के मूल्यांकन या परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की तकनीकी या मानवीय त्रुटि हुई है, तो उसे तत्काल प्रभाव से दुरुस्त किया जाए। विद्यार्थियों का कहना है कि उनकी शिकायतों को पूरी गंभीरता से सुना जाना चाहिए और एक तय समय सीमा के भीतर उनका समाधान किया जाना चाहिए। इस पूरे प्रकरण पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक और स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे छात्रों में असंतोष और अधिक गहराता जा रहा है।
- यूपी बोर्ड परीक्षा 2027 का विस्तृत कार्यक्रम घोषित: 5 फरवरी से शुरू होंगी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की वार्षिक परीक्षाएं - October 12, 2026
- मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा INDIA गठबंधन: राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत 11 नेताओं ने दाखिल की याचिका, मंगलवार को होगी सुनवाई - October 12, 2026
- 6 राज्यों के बदले राज्यपाल: चार नई नियुक्ति, दुष्यंत गौतम को सिक्किम की कमान - October 12, 2026