यूपी में बाढ़ और जलभराव पर गरमाई सियासत: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर साधा निशाना, बोले- “जब पानी में डूब गया है दीप तो दीया क्या जलाए कोई”

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उत्तर प्रदेश। सूबे में बाढ़ और भारी जलभराव की गंभीर समस्याओं को लेकर राजनीतिक पारा एक बार फिर चढ़ गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 18 सितंबर को राज्य के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ से बेहाल लोगों की दयनीय स्थिति को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला है। अपने तीखे बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि प्राकृतिक आपदा से घिरे गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों को शासन-प्रशासन की ओर से पर्याप्त और समय पर राहत नहीं मिल पा रही है।

​सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी एक मार्मिक पोस्ट में अखिलेश यादव ने लिखा कि “भला क्या जलाये कोई दीया, जब पानी में डूब गया है दीप।” इस शेर के जरिए उन्होंने बाढ़ की विभीषिका झेल रहे परिवारों के दर्द को बयां किया और सरकार की मौजूदा राहत व्यवस्थाओं की पोल खोलते हुए उस पर गंभीर सवाल खड़े किए।

​भोजन, पेयजल और दवाओं की मांग

अखिलेश यादव के अनुसार, प्रदेश में आई बाढ़ और जलभराव की वजह से अनगिनत परिवारों के आशियाने उजड़ चुके हैं, घर का कीमती घरेलू सामान खराब हो गया है और उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे कठिन हालातों में उन्होंने सरकार से पुरजोर मांग की है कि कागजी और हवाई दावों के बजाय सीधे जमीन पर उतरकर जरूरतमंदों तक फौरी राहत पहुंचाई जाए। उन्होंने विशेष तौर पर प्रभावित इलाकों में भरपेट भोजन, स्वच्छ पेयजल, जीवन रक्षक दवाइयों और दैनिक उपयोग की जरूरी वस्तुएं तत्काल उपलब्ध कराने की बात कही है।

​सरकार और प्रशासन का पक्ष

​दूसरी ओर, सरकार और प्रशासनिक मशीनरी के अपने दावे और रिकॉर्ड हैं। उत्तर प्रदेश के राहत आयुक्त कार्यालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल सितंबर महीने में बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुए परिवारों को त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए ‘राज्य आपदा मोचक निधि’ (SDRF) से लगातार धन आवंटित किया जा रहा है। इसी कड़ी में गत 11 सितंबर को भी राहत कार्यों के लिए सरकारी आदेश जारी कर बजट जारी किया गया था।

​इसी बीच, 18 सितंबर को उन्नाव जिले से सामने आए एक अन्य घटनाक्रम में यह देखने को मिला कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और भाजपा नेताओं ने खुद दौरा किया। राहत कार्यों के तहत वहां विशेष मेडिकल कैंप लगवाए गए, जहां ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें मुफ्त दवाइयां वितरित की गईं।

​इस प्रकार, इस पूरे घटनाक्रम में तस्वीर के दो अलग-अलग पहलू साफ नजर आते हैं एक तरफ जहां विपक्ष का यह पुख्ता आरोप है कि जमीनी स्तर पर राहत सामग्री जरूरतमंदों तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पा रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी दस्तावेज और प्रशासनिक गतिविधियां लगातार राहत व बचाव कार्य जारी होने का दावा कर रही हैं।

Dr. Bhanu Pratap Singh