Agra News: बारिश में खुला नाला बना मौत का जाल: शाहगंज के केदार नगर में साइकिल समेत नाले में गिरे बुजुर्ग की दर्दनाक मौत, परिवार में मातम

स्थानीय समाचार

आगरा। शहर में भारी बारिश के बीच नालों की सफाई और सुरक्षा व्यवस्था के दावों की एक बार फिर पोल खुलती नजर आई है। शाहगंज थाना क्षेत्र के केदार नगर में खुले नाले में गिरने से एक बुजुर्ग की दर्दनाक मौत हो गई। हादसा रात के समय हुआ, जब बुजुर्ग अपनी साइकिल लेकर गुजर रहे थे। अचानक वह सड़क किनारे खुले नाले में साइकिल समेत जा गिरे। हादसे के बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों ने किसी तरह बुजुर्ग को नाले से बाहर निकाला और उनके घर पहुंचाया, लेकिन कुछ ही देर में उनकी हालत बिगड़ गई। अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, मगर रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। इस अचानक हुई दुर्घटना के बाद पीड़ित परिवार में कोहराम मच गया है।

​खुले नाले में समा गए ओम प्रकाश

मृतक की पहचान ओम प्रकाश के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह शुक्रवार रात करीब 11:15 बजे केदार नगर इलाके में राजकमल इंटर कॉलेज के पास से गुजर रहे थे। लगातार हो रही बारिश के कारण आसपास काफी पानी भरा हुआ था और सड़क किनारे स्थित नाला पानी में डूबने के कारण बिल्कुल दिखाई नहीं दे रहा था। इसी दौरान अचानक उनकी साइकिल का संतुलन बिगड़ा और वह सीधे खुले नाले में जा गिरे। अंधेरा और बारिश तेज होने के कारण हादसे की गंभीरता का तत्काल पता नहीं चल सका। जब आसपास मौजूद लोगों की नजर पड़ी, तो उन्होंने दौड़कर बुजुर्ग को बाहर निकालने का प्रयास किया और स्थानीय लोगों की मदद से ओम प्रकाश को सुरक्षित नाले से बाहर निकाल लिया गया।

​घर पहुंचते ही अचानक बिगड़ गई हालत

स्थानीय लोगों द्वारा बाहर निकाले जाने के बाद ओम प्रकाश को उनके घर पहुंचाया गया। परिजनों को इस बात की उम्मीद थी कि समय रहते उन्हें प्राथमिक उपचार मिल जाएगा और उनकी जान बच जाएगी, लेकिन घर पहुंचने के कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक तेजी से बिगड़ने लगी। परिजन उन्हें फौरन अस्पताल ले जाने के लिए निकले, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में ओम प्रकाश ने दम तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया। एक तरफ जहां परिवार ने अपना मुख्य सदस्य खो दिया, वहीं दूसरी तरफ इस हादसे ने शहर में खुले और असुरक्षित नालों की हकीकत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

​बारिश में कहां गायब हो जाता है सड़क और नाले का फर्क?

केदार नगर में हुई यह दर्दनाक घटना सिर्फ एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह बारिश के दौरान शहर की लचर जल निकासी व्यवस्था पर भी बड़ा सवालिया निशान लगाती है। बारिश के समय जब सड़कों और गलियों में पानी भर जाता है, तो कई स्थानों पर सड़क और नाले के बीच का अंतर पूरी तरह समाप्त हो जाता है। ऐसे में खुले नाले और बिना किसी सुरक्षा इंतजाम वाले स्थान राहगीरों के लिए सीधा ‘मौत का जाल’ बन जाते हैं। खासकर रात के वक्त जब रोशनी की कमी होती है, तब वहां से गुजरने वाले आम नागरिकों और वाहन चालकों के लिए खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

​बेटे का दर्द— “सिस्टम से कैसे लड़ते?”

दुर्घटना के बाद मृतक ओम प्रकाश के बेटे ने व्यवस्था के प्रति अपनी गहरी पीड़ा जाहिर की। उनका कहना है कि परिवार के सामने इस वक्त सबसे बड़ा दुख अपने प्रिय सदस्य को खोने का है। ऐसे में किसी प्रशासनिक विभाग से शिकायत करने या सिस्टम से कानूनी लड़ाई लड़ने की स्थिति में परिवार खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहा है। बेटे के मुताबिक, “सिस्टम से कैसे लड़ते?” इसी बेबसी और गहरे मानसिक आघात के बीच परिवार ने बिना किसी पुलिसिया शिकायत के ही ओम प्रकाश का अंतिम संस्कार कर दिया। परिवार का यह दर्द यह बयां करता है कि किसी भी हादसे के बाद केवल मुआवजा या कागजी जांच ही काफी नहीं है, बल्कि ऐसी ठोस व्यवस्था की दरकार है जिससे भविष्य में किसी दूसरे परिवार को इस तरह का असहनीय दर्द न झेलना पड़े।

​जिम्मेदार कौन और सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं?

इस हृदयविदारक हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि राजकमल इंटर कॉलेज के पास स्थित खुले नाले की वास्तविक सुरक्षा स्थिति क्या थी? यदि नाला खुला था तो वहां नगर निगम द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए? बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति में राहगीरों को खतरे से आगाह करने के लिए वहां बैरिकेडिंग, पक्के ढक्कन या चेतावनी संकेतक क्यों नहीं लगाए गए? नगर निगम की जिम्मेदारी केवल शहर के नालों की खानापूर्ति वाली सफाई तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जहां खुले नाले नागरिकों के जीवन के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं, वहां उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अब इस घटना के बाद यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या नगर निगम या संबंधित विभाग ने शहर के ऐसे खतरनाक खुले नालों को कभी चिन्हित किया था?

​लापरवाही ने ली एक और बेकसूर की जान

आगरा में मानसून या बारिश के दिनों में जलभराव की समस्या कोई नई बात नहीं है। आए दिन कई इलाकों में नाले और सड़कें पानी में एक जैसी दिखाई देने लगती हैं, जिससे अनहोनी की आशंका बनी रहती है। केदार नगर की इस घटना ने इसी छिपे हुए खतरे को बेहद दर्दनाक तरीके से उजागर कर दिया है। एक बुजुर्ग की जान चली गई और अब उनके परिवार के पास केवल आंसू, यादें और अनुत्तरित सवाल रह गए हैं। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ओम प्रकाश नाले में कैसे गिरे, बल्कि यह भी है कि जिस असुरक्षित नाले में गिरकर एक इंसान की सांसें थम गईं, उसकी देखरेख और सुरक्षा की नैतिक जिम्मेदारी आखिरकार किसकी थी?

Dr. Bhanu Pratap Singh