🌸 आधी रात को गूंजा वृंदावन चंद्रोदय मंदिर—‘हरे कृष्ण’ के जयघोष से झूम उठा धाम
श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं के बीच भव्यता से मनाया गया श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव
🛕 पुष्पों और विद्युत सज्जा से सजा चंद्रोदय मंदिर
वृन्दावन। वृन्दावन चंद्रोदय मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण दिवस श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आध्यात्मिक उल्लास, भक्ति और वैदिक परंपराओं के साथ भव्य रूप से मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे पुष्पों एवं आकर्षक विद्युत सज्जा से सुसज्जित किया गया। उत्सव में लड्डू गोपाल अभिषेक, छप्पन भोग, विशेष श्रृंगार, झूलन उत्सव, भजन संध्या और हरिनाम संकीर्तन प्रमुख आकर्षण रहे।
🌺 108 प्रकार के फलों के रस से हुआ भव्य महाभिषेक
वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य भगवान श्रीश्री राधा वृन्दावन चंद्र का पंचगव्य—दूध, दही, घी, शहद एवं मिश्री—के साथ 108 प्रकार के फलों के रस, औषधियों और पुष्पों से भव्य महाभिषेक किया गया। इस अवसर पर भगवान को श्याम रंग के रेशमी एवं चांदी की कढ़ाई युक्त वस्त्र धारण कराए गए। वहीं निताई-गौरांग को भी विशेष अलंकरण एवं पुष्पमालाओं से सुशोभित किया गया।
🕉️ “श्रीकृष्ण स्वयं पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान हैं”: चंचलापति दास
“श्रीकृष्ण स्वयं भगवान हैं”—इस शाश्वत सत्य को रेखांकित करते हुए मंदिर अध्यक्ष श्री चंचलापति दास जी ने श्रीमद्भागवत के प्रसिद्ध श्लोक—
“एते चांशकलाः पुंसः कृष्णस्तु भगवान् स्वयम्।
इन्द्रारि-व्याकुलं लोकं मृडयन्ति युगे युगे॥”
का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण सभी अवतारों के मूल स्रोत एवं स्वयं पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान हैं।
जब-जब संसार अधर्म और आसुरी शक्तियों के कारण व्याकुल होता है, तब भगवान भक्तों की रक्षा, धर्म की स्थापना तथा समस्त जीवों के कल्याण के लिए युग-युग में अवतरित होते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण भक्तों पर अपनी विशेष कृपा करते हुए अर्चा-विग्रह के रूप में भी हमारे मध्य विराजमान हैं, जिससे भक्त प्रत्यक्ष रूप से उनकी सेवा, पूजा और आराधना कर सकें।
उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी केवल भगवान के अवतरण का उत्सव नहीं, बल्कि भगवान के प्रति अपने प्रेम, श्रद्धा और भक्ति को जागृत करने का पावन अवसर है।

🔔 रात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण के प्राकट्य से गूंज उठा मंदिर
रात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के साथ ही पूरा मंदिर परिसर “हरे कृष्ण, हरे कृष्ण” और श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने हरिनाम संकीर्तन एवं गौड़ीय वैष्णव संगीत में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। मंदिर परिसर इत्र एवं प्राकृतिक सुगंधित अगरबत्तियों की सुगंध से सुवासित रहा।
🇮🇳 देशभर से वृन्दावन पहुंचे श्रद्धालु
इस पावन अवसर पर लखनऊ, आगरा, दिल्ली, जयपुर सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य अतिथि वृन्दावन पहुंचे और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य प्राकट्य उत्सव में सहभागिता की।
✍️ संपादकीय
आस्था के उत्सव को संस्कारों का पर्व बना रहा चंद्रोदय मंदिर
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का विराट उत्सव है। वृन्दावन जैसी कृष्ण की पावन भूमि पर जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है तो उसकी अनुभूति सामान्य उत्सव से कहीं अधिक गहरी और आत्मिक होती है।
वृन्दावन चंद्रोदय मंदिर में जिस श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपरा के साथ जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किया गया, वह निश्चित रूप से सराहनीय है। पुष्प सज्जा, विद्युत सज्जा, महाभिषेक, छप्पन भोग, विशेष श्रृंगार, झूलन उत्सव, भजन संध्या और हरिनाम संकीर्तन ने पूरे वातावरण को कृष्णमय बना दिया।
इस आयोजन की विशेषता केवल इसकी भव्यता नहीं, बल्कि इसके पीछे दिखाई देने वाली आध्यात्मिक दृष्टि और भारतीय वैदिक परंपराओं के प्रति प्रतिबद्धता है। आधुनिक समय में जब धार्मिक आयोजनों में बाहरी प्रदर्शन कई बार मूल आध्यात्मिक भावना पर भारी पड़ जाता है, ऐसे में परंपरा और भक्ति का संतुलित समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।
इस दृष्टि से चंद्रोदय मंदिर वृन्दावन के अध्यक्ष श्री चंचलापति दास जी की विशेष सराहना की जानी चाहिए। उन्होंने जन्माष्टमी के अवसर पर श्रीमद्भागवत के माध्यम से श्रीकृष्ण के आध्यात्मिक स्वरूप और उनके संदेश को श्रद्धालुओं के सामने रखा। उनका यह प्रयास केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा से जोड़ने का माध्यम भी बन सकता है।
जन्माष्टमी का वास्तविक संदेश भी यही है—धर्म केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली चेतना है। श्रीकृष्ण का जीवन हमें कर्म, कर्तव्य, प्रेम, करुणा, नीति और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यदि जन्माष्टमी के अवसर पर हम अपने जीवन में इन मूल्यों का थोड़ा भी समावेश कर सकें तो यही भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
चंद्रोदय मंदिर द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को एक ऐसा आध्यात्मिक वातावरण उपलब्ध कराना, जहां हरिनाम संकीर्तन, वैदिक मंत्रोच्चारण और भगवान की आराधना के माध्यम से मन को शांति मिले, आज के तनावपूर्ण जीवन में विशेष महत्व रखता है।
वृन्दावन की पहचान सदियों से कृष्ण की भक्ति, प्रेम और संगीत से रही है। ऐसे में यहां होने वाले धार्मिक आयोजनों की जिम्मेदारी भी बड़ी है। चंद्रोदय मंदिर ने इस जिम्मेदारी को श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाने का प्रयास किया है।
निस्संदेह, श्री चंचलापति दास के नेतृत्व में चंद्रोदय मंदिर की ऐसी गतिविधियां वृन्दावन की आध्यात्मिक गरिमा को और समृद्ध करती हैं। आवश्यकता इस बात की है कि धार्मिक आयोजनों को केवल उत्सव न बनाकर संस्कार, सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक जागरण का माध्यम बनाया जाए।
यही श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी का सार है—
मन में भक्ति हो, कर्म में धर्म हो और जीवन में मानवता हो।
— डॉक्टर भानु प्रताप सिंह, संपादक
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