🌿 सावन की फुहार, सिंधी संस्कृति की बहार: सिंधु भवन में गूंजे तीजड़ी के गीत
जय झूलेलाल सेवा संगठन लेडीज विंग ने धूमधाम से मनाया तीजड़ी उत्सव, मेंहदी, नृत्य और गीतों से सजी यादगार शाम
सिंधी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक संस्कृति और आधुनिक उत्साह का किया खूबसूरत संगम
Live Story Time
Agra, Uttar Pradesh, India Bharat
आगरा। सिंधी समाज के पावन पर्व ‘तीजड़ी व्रत’ के उपलक्ष्य में रविवार को जय झूलेलाल सेवा संगठन (लेडीज विंग) द्वारा कमला नगर स्थित सिंधु भवन में भव्य एवं रंगारंग ‘तीजड़ी उत्सव’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और गीत-संगीत, नृत्य एवं विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों का आनंद उठाया।
तीजड़ी व्रत: आस्था, सुहाग और पारिवारिक सुख का पर्व
सिंधी समाज में तीजड़ी व्रत का अत्यंत विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व है। महिलाएं यह व्रत अपने पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखती हैं।
इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और तीजड़ी माता की कथा सुनने तथा विधिवत पूजन के पश्चात ही व्रत खोलती हैं। इस वर्ष यह पवित्र पर्व 31 अगस्त को श्रद्धा, आस्था और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा।
💃 मेंहदी से सजे हाथ, सावन के गीतों पर थिरके कदम
इसी कड़ी में आयोजित इस पूर्व-उत्सव समारोह में महिलाओं के लिए नि:शुल्क मेंहदी की विशेष व्यवस्था की गई। बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपने हाथों पर आकर्षक एवं सुंदर मेंहदी सजवाई और उत्सव का आनंद लिया।
कार्यक्रम में ‘बेस्ट ड्रेस प्रतियोगिता’ का भी आयोजन किया गया। इसके साथ ही ‘मिस तीजड़ी क्वीन’ का चयन भी किया गया। महिलाओं ने पारंपरिक एवं आधुनिक परिधानों में अपनी प्रतिभा और आकर्षक व्यक्तित्व का प्रदर्शन किया।
सावन के मस्त गीतों पर महिलाओं ने जमकर नृत्य किया और पूरा सिंधु भवन उल्लास एवं उमंग से गूंज उठा। महिलाओं ने एक-दूसरे को तीजड़ी पर्व की शुभकामनाएं देते हुए इस सांस्कृतिक मिलन को यादगार बना दिया।
🌺 अतिथियों ने की सांस्कृतिक आयोजन की सराहना
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. पूजा जस्नानी एवं डॉ. सिम्पी राजपाल उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथियों के रूप में सिंधी सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश सोनी, परमानंद अतवाणी, जय किशन बुधरानी एवं लक्ष्मण रामत्री सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
अतिथियों ने जय झूलेलाल सेवा संगठन लेडीज विंग के इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकजुटता को सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
🌹 इनकी रही मौजूदगी
अनीता मुलानी, संजना नागरानी, अनु अतवानी, आरती अतवानी, गंगा साधवानी, हिमांशी कामरा, संचिता जुम्मानी, जिया रामत्री, रीतिका जुम्मानी, लीना करीरा, सोनी सावलानी, विनीता रामरख्यानी, गिन्नी दियालानी, राधिका खत्री, तृषा नाथवानी आदि उपस्थित रहीं।
🖋️ संपादकीय
परंपराओं की डोर थामे रखना ही संस्कृति की असली ताकत
समय बदलता है, पीढ़ियां बदलती हैं और जीवन जीने के तौर-तरीके भी बदलते हैं, लेकिन जो समाज अपनी संस्कृति और परंपराओं की जड़ों से जुड़ा रहता है, उसकी पहचान कभी धुंधली नहीं पड़ती। तीजड़ी जैसे पर्व इसी सांस्कृतिक चेतना को जीवंत रखने का माध्यम हैं।
सिंधी समाज ने अपनी परंपराओं, धार्मिक आस्थाओं और सामाजिक मूल्यों को विपरीत परिस्थितियों में भी जिस मजबूती से संभालकर रखा है, वह अपने आप में प्रेरणादायक है। तीजड़ी व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि परिवार, दांपत्य प्रेम, विश्वास और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक भी है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ऐसे सांस्कृतिक आयोजन इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाते हैं क्योंकि इनमें नई पीढ़ी को अपनी विरासत को करीब से देखने और समझने का अवसर मिलता है। गीत, नृत्य, पारंपरिक परिधान, मेंहदी और धार्मिक परंपराएं केवल मनोरंजन के साधन नहीं हैं; वे संस्कृति की जीवंत पाठशाला हैं।
इस दृष्टि से जय झूलेलाल सेवा संगठन की लेडीज विंग द्वारा आयोजित तीजड़ी उत्सव की जितनी सराहना की जाए, कम है। संगठन ने महिलाओं को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराया जहां आस्था, आनंद, कला, परंपरा और सामाजिक मेल-मिलाप एक साथ दिखाई दिए। यह आयोजन निश्चित रूप से केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली एक सुंदर पहल है।
विशेष रूप से महिलाओं की सक्रिय भागीदारी इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषताओं में रही। महिलाओं ने न केवल उत्सव को जीवंत बनाया, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। मां और परिवार की महिलाएं जिस संस्कृति को जीती हैं, वही संस्कृति बच्चों के संस्कारों में उतरती है।
जय झूलेलाल सेवा संगठन लेडीज विंग को इस सुंदर, गरिमापूर्ण और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध आयोजन के लिए साधुवाद। ऐसे कार्यक्रम लगातार होते रहने चाहिए, ताकि समाज की नई पीढ़ी अपनी जड़ों, अपनी परंपराओं और अपनी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी रहे।
आज आवश्यकता केवल परंपराओं को याद करने की नहीं, बल्कि उन्हें उत्सव के रूप में जीवित रखने की है। तीजड़ी उत्सव ने यही संदेश दिया—संस्कृति तभी जीवित रहती है, जब उसे अगली पीढ़ी प्रेम, गर्व और उत्साह के साथ अपनाती है।
सिंधु भवन में सजी यह शाम केवल एक कार्यक्रम नहीं थी; यह सिंधी संस्कृति की जीवंत तस्वीर, नारी शक्ति का उत्सव और सामाजिक एकता का सुंदर संदेश थी।
— डॉक्टर भानु प्रताप सिंह, संपादक
- आगरा में जनकपुरी महोत्सव की तैयारियों ने पकड़ा जोर: नगर आयुक्त ने दिए तत्काल सर्वे और विकास कार्य शुरू कराने के निर्देश, समिति ने की मुलाकात - August 31, 2026
- पश्चिम बंगाल कैडर के युवा आईएएस विवेक पंकज का ‘लीडर्स आगरा’ परिवार ने किया सम्मान: भगवान बुद्ध की प्रतिमा और पुस्तक भेंट कर दी शुभकामनाएं - August 31, 2026
- सावन की फुहार, सिंधी संस्कृति की बहार: सिंधु भवन आगरा में गूंजे तीजड़ी के गीत - August 31, 2026