​प्रकृति से प्रेम और पर्यावरण संरक्षण ही श्रीकृष्ण भक्ति का संदेश: कमला नगर में परमहंस स्वामी गिरिशानंद सरस्वती के मुख से बही श्रीमद्भागवत की अमृतधारा

RELIGION/ CULTURE

आगरा। कमला नगर स्थित अग्रवाल सेवा सदन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस कथा व्यास परमहंस स्वामी गिरिशानंद सरस्वती ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन पर्वत लीला एवं छप्पन भोग प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी बाल लीलाओं के प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। गोवर्धन लीला के अवसर पर भव्य गोवर्धन पूजन एवं छप्पन भोग के दर्शन कराए गए।

कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन प्रकृति, पर्यावरण और जीव-जगत के प्रति प्रेम का संदेश देता है। श्रीकृष्ण ने अपने बाल्यकाल में ग्वाल-बालों और गौवंश के साथ ब्रज की प्रकृति के बीच समय बिताया। यमुना, गोवर्धन पर्वत, वन, वृक्ष और समस्त जीव-जंतु उनकी लीलाओं के अभिन्न अंग रहे। इसलिए श्रीकृष्ण की भक्ति का अर्थ प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होना भी है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में पर्यावरण संरक्षण केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दायित्व भी है। वृक्षों की रक्षा, नदियों को स्वच्छ रखना, गौसेवा, जीव-जंतुओं के प्रति करुणा और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण ही प्रकृति पूजन का वास्तविक स्वरूप है। यदि हम प्रकृति का सम्मान करेंगे तो आने वाली पीढ़ियों को भी स्वच्छ जल, शुद्ध वायु और सुरक्षित पर्यावरण मिल सकेगा।

गोवर्धन पर्वत लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को प्रकृति के महत्व का बोध कराया। गोवर्धन केवल एक पर्वत नहीं, बल्कि ब्रजवासियों के जीवन, गौवंश, वनस्पति और प्राकृतिक संसाधनों का आधार है। भगवान ने संदेश दिया कि जिस प्रकृति से हमारा जीवन चलता है, उसके प्रति कृतज्ञता और संरक्षण का भाव होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा हमें पर्यावरण संतुलन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश देती है। मनुष्य को प्रकृति का स्वामी नहीं, बल्कि उसका संरक्षक बनकर रहना चाहिए। आज आवश्यकता है कि धार्मिक आयोजनों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी लिया जाए और अधिक से अधिक पौधे लगाए जाएं।

भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में प्रेम, सरलता, मित्रता और आनंद का भाव छिपा है। माखन चोरी की लीला भी केवल मनोरंजन का प्रसंग नहीं, बल्कि भगवान और भक्त के बीच के निश्छल प्रेम का प्रतीक है। श्रीकृष्ण का बाल स्वरूप हमें जीवन में सहजता, प्रसन्नता और प्रेम बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

गोवर्धन लीला के पश्चात भव्य छप्पन भोग सजाया गया और श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण एवं गोवर्धन महाराज के दर्शन कर पूजन किया। छप्पन भोग के दर्शन के दौरान कथा स्थल पर भक्ति और उत्साह का वातावरण रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान के जयकारे लगाए और सामूहिक रूप से प्रकृति संरक्षण तथा सनातन संस्कारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला दिव्य ग्रंथ है। इसके प्रत्येक प्रसंग में मानव जीवन के लिए कोई न कोई संदेश छिपा हुआ है। श्रीकृष्ण की लीलाएं हमें प्रेम करना सिखाती हैं, गोवर्धन लीला प्रकृति का सम्मान करना सिखाती है और उनकी गौसेवा की भावना जीवों के प्रति करुणा का संदेश देती है।

मुख्य यजमान पंकज अग्रवाल एवं आरती अग्रवाल रहे। इस अवसर पर हर्ष अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, पिंकी अग्रवाल, ऋषभ अग्रवाल, पलक अग्रवाल, विशाल अग्रवाल, पूनम अग्रवाल, चिराग अग्रवाल, सोनम अग्रवाल, हिमांशु मित्तल, रुचि मित्तल, विपुल बंसल, तन्वी बंसल, शुभम अग्रवाल, दीक्षा अग्रवाल, यश बंसल, मुस्कान बंसल, राजीव गर्ग, अर्चना गर्ग, रामकिशन अग्रवाल, सारिका अग्रवाल, लता बंसल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन रजत पांडे ने किया।

Dr. Bhanu Pratap Singh