नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर में 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने एक भव्य समारोह को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने देश की युवा शक्ति यानी ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ (जनसांख्यिकीय लाभांश) पर विशेष रूप से जोर दिया। आरएसएस प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें देश के युवाओं से बातचीत करने के लिए कहा गया था, और यदि इन युवाओं को सही दिशा और उचित तरीके से नहीं संभाला गया, तो यही अपार ऊर्जा भविष्य में समाज के लिए एक बड़ा बोझ बनकर रह जाएगी।
मोहन भागवत ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हम सबके लिए गौरव का और उत्सव का विषय़ है। 1857 से गिनेंगे तो लगातार 90 वर्ष अनेक प्रकार का त्याग बलिदान देकर हमारे पूर्वजों ने स्वातंत्र्य की प्राप्ति की। उस त्याग और बलिदान का गौरव हमारे मन में है। लेकिन इसके साथ एक भान मन में चाहिए, कि इतना त्याग-परिश्रम करके स्वतंत्रता हमको मिली है, उस स्वतंत्रता को कायम रखना और जैसा सावरकर जी ने कहा है – “जे जे उत्तम, उदात्त, उन्नत, महन्मधुर ते ते। स्वतंत्रते भगवती, सर्व तव सहचारी होते” — तो स्वतंत्रता का परिणाम जो-जो उत्तम, उदात्त, उन्नत, महन्मधुर है, वह सब कुछ हमारे देश में अवतीर्ण हो। इसकी आवश्यकता पूर्ण करने का दायित्व भी हमारा बनता है।
आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने आज 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कहा कि स्वतंत्रता दिवस हम सब के लिए गौरव का और उत्सव का विषय है। 1857 से गिनेंगे तो लगातार 90 साल अनेक प्रकार का त्याग बलिदान देकर हमारे पूर्वजों ने हमारे लिए स्वातंत्र्य की प्राप्ति हमको करा दी। उस त्याग और बलिदान का गौरव हमारे मन में है और उसको एक सफल सांगता मिली इसका आनंद हमारे मन में है।
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