अयोध्या राम मंदिर CEO चयन प्रक्रिया: प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ शिखा, जनेऊ, खान-पान और धार्मिक जीवनशैली पर भी पूछे जा रहे सवाल

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अयोध्या में राम मंदिर के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के प्रतिष्ठित पद के लिए चल रही चयन प्रक्रिया में इन दिनों केवल प्रशासनिक अनुभव और कामकाजी दक्षता ही नहीं, बल्कि उम्मीदवारों के व्यक्तिगत धार्मिक जीवन, आस्था और उनके रहन-सहन से जुड़े सवाल भी सुर्खियों में छाए हुए हैं। चयन प्रक्रिया के दूसरे दिन बुधवार को कुल 6 उम्मीदवार अपना इंटरव्यू देने के लिए पहुँचे।

राम मंदिर परिसर के ग्रीन हाउस में सुबह 11:30 बजे से शुरू हुई यह साक्षात्कार प्रक्रिया दोपहर 3 बजे तक चली, जिसमें प्रत्येक उम्मीदवार से करीब 40 से 50 मिनट तक विस्तार से सवाल-जवाब किए गए।

शिखा, जनेऊ और खान-पान से जुड़े सवाल

साक्षात्कार के दौरान उम्मीदवारों से उनकी व्यक्तिगत धार्मिक मान्यताओं और दिनचर्या को लेकर कई गहरे सवाल पूछे जा रहे हैं। उनसे मुख्य रूप से यह पूछा जा रहा है कि वे शिखा रखते हैं या नहीं, जनेऊ धारण करते हैं या नहीं, और उनका खान-पान पूरी तरह शुद्ध शाकाहारी है या मांसाहारी। इसके अलावा, शराब के सेवन को लेकर भी उनसे सीधे सवाल किए जा रहे हैं।

​उम्मीदवारों की धार्मिक आस्था की गहराई को मापने के साथ-साथ यह भी जानने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या वे सनातन हिंदू धार्मिक परंपराओं के अनुसार वेशभूषा और पहनावा रखने में पूरी तरह सहज हैं या नहीं। इन आध्यात्मिक और व्यक्तिगत पहलुओं के साथ-साथ उनके प्रशासनिक अनुभव, विशाल टीम को संभालने की क्षमता, पूर्व में किसी धार्मिक संस्थानों के साथ काम करने के अनुभव तथा राम मंदिर की भविष्य की व्यवस्था को लेकर उनकी विजनरी सोच पर भी गहन चर्चा की जा रही है।

​5,300 से अधिक आवेदन और 18 उम्मीदवार मैदान में

​राम मंदिर के इस सर्वोच्च प्रशासनिक पद के लिए देश भर से 5,300 से अधिक लोगों ने आवेदन किया था, जिनमें से कड़ी छंटाई के बाद केवल 18 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए चुना गया है। कुल चार दिनों तक चलने वाली इस चयन प्रक्रिया के पूरा होने के बाद शीर्ष 3 नामों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। इसके बाद इन तीनों अंतिम उम्मीदवारों का साक्षात्कार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा लिया जाएगा, और अंत में ट्रस्ट की ओर से ही CEO के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।

​उम्मीदवारों का साक्षात्कार लेने वाली उच्च स्तरीय चयन समिति में रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, प्रख्यात पूर्व वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावड़े और रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी शामिल हैं।

​पहले दिन 8 पूर्व दिग्गजों ने दिया था इंटरव्यू

इस चयन प्रक्रिया के पहले दिन यानी मंगलवार को कुल 8 उम्मीदवारों ने अपना इंटरव्यू दिया था। इस पहले दौर में 3 पूर्व आईएएस (IAS), एक पूर्व आईपीएस (IPS) और 4 पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल थे। विशेष रूप से चर्चित एनकाउंटर स्पेशलिस्ट रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय और जौनपुर के पूर्व जिलाधिकारी (DM) दिनेश चंद्र भी इस पद के लिए इंटरव्यू देने पहुँचे थे।

​34 सवालों की स्क्रूटनी के बाद हुआ चयन

​इस पद के लिए 13 से 18 जुलाई के बीच ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए थे, जिसमें उम्मीदवारों से गूगल फॉर्म के जरिए कुल 34 तीखे और विस्तृत सवाल पूछे गए थे। इन फॉर्म्स में उनकी सर्वोच्च शैक्षणिक योग्यता, प्रशासनिक अनुभव, वर्तमान नौकरी या सेवानिवृत्ति का विवरण और बड़ी टीमों के नेतृत्व की क्षमता से जुड़ी जानकारियां ली गई थीं।

उम्मीदवारों से यह भी विशेष रूप से पूछा गया था कि क्या वे इससे पहले किसी मंदिर, मठ या अन्य धार्मिक संगठन से जुड़े रहे हैं; यदि हाँ, तो उन्होंने वहां कितने समय तक अपनी सेवाएं दी थीं। इसके अतिरिक्त, सभी आवेदकों को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के विकास और प्रबंधन के लिए अपना विजन और विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया गया था।

​तय की गई पात्रता की प्रमुख शर्तें

​इस उच्च पद के लिए ट्रस्ट की ओर से कुछ स्पष्ट और सख्त मानक तय किए गए हैं । जिसमें आवेदक की आयु 50 वर्ष से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए। उम्मीदवार के पास सामान्य प्रशासन, वित्त एवं लेखा, मानव संसाधन, जनसंपर्क, आईटी, सुरक्षा या कानून जैसे क्षेत्रों में न्यूनतम 20 वर्षों का लंबा अनुभव होना अनिवार्य है। चयनित CEO की नियुक्ति शुरुआती तौर पर 3 वर्षों के लिए की जाएगी, जिसे उनके कार्य प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकेगा।

Dr. Bhanu Pratap Singh