चमत्कार के बाद आखिरकार थमी जिंदगी की जंग: दस दिन पहले अर्थी से जिंदा लौटीं शीला देवी का रविवार को हुआ देहावसान

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आगरा: ताजनगरी में पिछले दिनों एक मेडिकल मिरेकल के रूप में चर्चा में आई और डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद अंतिम संस्कार की तैयारियों के बीच अचानक जिंदा हो उठी 65 वर्षीया महिला शीला देवी का आखिरकार रविवार को आधिकारिक तौर पर देहावसान हो गया। इस दुखद घटना के बाद एक बार फिर मृतका के परिवार और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स और पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लगभग 65 वर्षीया शीला देवी (पत्नी स्वर्गीय हरिओम माहौर) गंभीर लीवर संबंधी बीमारी से पीड़ित थीं। उनका काफी समय से इलाज चल रहा था। पूर्व में उन्हें उत्तर प्रदेश के ही बरेली शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान गत 30 जुलाई की तड़के डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें मृत घोषित कर दिया था। इसके पश्चात उनके बेटे सुनील माहौर एक एंबुलेंस के जरिए अपनी मां के शव को लेकर गत 30 जुलाई की शाम करीब सात बजे आगरा स्थित उनके पैतृक घर पहुंचे थे।

​घर पर अंतिम संस्कार की चल रही थीं तैयारियां, तभी हुआ था चमत्कार

परिजनों द्वारा घर पहुंचने के बाद शव को कमरे में जमीन पर लिटा दिया गया था और अगले दिन के लिए अंतिम संस्कार की सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई थीं। घर पर शोक व्यक्त करने के लिए रिश्तेदारों का आना-जाना शुरू हो चुका था और चारों तरफ मातम पसरा हुआ था। तभी परिवार के एक दामाद अपनी सास को अंतिम प्रणाम करने के लिए उनके पास पहुंचे। जैसे ही उन्होंने शीला देवी के चरणों को छुआ, अचानक उनके शरीर में एक हलचल महसूस हुई और वह चमत्कारिक रूप से जीवित हो उठीं।

​इस घटना के बाद परिवार में खुशी और आश्चर्य का माहौल बन गया था और उन्हें तुरंत आनन-फानन में शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पिछले दस दिनों से डॉक्टर उनकी जान बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे थे।

दस दिन तक चली जिंदगी और मौत की जंग

अस्पताल में पिछले एक सप्ताह से अधिक समय तक परिवार के सभी सदस्य लगातार उनकी सलामती और जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे थे। हालांकि, वे मौत के मुंह से लौटकर तो जरूर आई थीं, लेकिन उनकी शारीरिक स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई थी। आखिरकार, रविवार की सुबह शीला देवी की जिंदगी की यह लंबी जंग थम गई और उन्होंने अस्पताल में ही अपनी अंतिम सांस ली।

जैसे ही शीला देवी के निधन की दूसरी और वास्तविक खबर परिवार तक पहुंची, उनके बेटे सुनील माहौर और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और पूरे घर में एक बार फिर से गहरा मातम छा गया।

Dr. Bhanu Pratap Singh