विधान परिषद की छह शिक्षक सीटों पर चुनाव लड़ेगा राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, प्रत्याशी चयन प्रक्रिया तेज
प्रदेश नेतृत्व की आगरा में महत्वपूर्ण बैठक, मेरठ, आगरा और लखनऊ की सीटों पर नाम लगभग तय
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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.
आगरा स्थित एच.आर. स्टेट में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उत्तर प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में आगामी उत्तर प्रदेश विधान परिषद की छह शिक्षक सीटों के चुनाव को लेकर व्यापक रणनीति तैयार की गई। संगठन ने इस बार सभी छह शिक्षक सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने का निर्णय लिया है।
चुनावी तैयारियां शुरू
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उत्तर प्रदेश (माध्यमिक संवर्ग) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनूप शर्मा ने बताया कि लखनऊ, आगरा, मेरठ, मुरादाबाद-बरेली तथा गोरखपुर-अयोध्या शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के वर्तमान एमएलसी का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इन सीटों पर नवंबर 2026 में चुनाव प्रस्तावित हैं, जिसके लिए संगठन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
छह दिसंबर को समाप्त होगा वर्तमान एमएलसी का कार्यकाल
डॉ. अनूप शर्मा ने बताया कि लखनऊ, आगरा, मेरठ, मुरादाबाद-बरेली तथा गोरखपुर-अयोध्या (फैजाबाद) शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से निर्वाचित विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी) का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इन सीटों पर नवंबर 2026 में चुनाव प्रस्तावित हैं। इसे देखते हुए महासंघ ने समय रहते संगठनात्मक तैयारी शुरू कर दी है।
चयन प्रक्रिया की कमान डॉ. देवी सिंह नरवार को
बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रत्याशियों के चयन की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और संगठनात्मक सहमति के आधार पर होगी।
महासंघ के संस्थापक डॉ. देवी सिंह नरवार को सेलेक्शन एंड स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि माध्यमिक संवर्ग के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह को समिति का संयोजक बनाया गया है।
डॉ. नरवार वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों से लगातार विचार-विमर्श कर ऐसे प्रत्याशियों का चयन कर रहे हैं, जो शिक्षक समाज की अपेक्षाओं पर खरे उतरें और संगठन की विचारधारा को मजबूती से आगे बढ़ा सकें।
तीन सीटों पर नाम लगभग तय, अन्य पर मंथन जारी
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनूप शर्मा ने जानकारी दी कि मेरठ, आगरा और लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए संभावित प्रत्याशियों के नाम लगभग तय हो चुके हैं। वहीं मुरादाबाद-बरेली तथा गोरखपुर-अयोध्या सहित शेष सीटों पर वरिष्ठ नेतृत्व के स्तर पर विचार-विमर्श जारी है। अंतिम सूची संगठन द्वारा शीघ्र घोषित किए जाने की संभावना है।
शिक्षक हितों को मिलेगा मजबूत प्रतिनिधित्व
बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ लंबे समय से शिक्षकों के अधिकारों, शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षक सम्मान के लिए कार्य करता रहा है। विधान परिषद में संगठन का सशक्त प्रतिनिधित्व होने से शिक्षक समाज की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाने और उनके समाधान की दिशा में ठोस प्रयास किए जा सकेंगे।
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्याशी चयन में संगठन के प्रति समर्पण, शिक्षा जगत में योगदान, सामाजिक प्रतिष्ठा और शिक्षक हितों के लिए किए गए कार्यों को प्रमुख आधार बनाया जाएगा।
संपादकीय :शिक्षक राजनीति में बढ़ती सक्रियता का संकेतउत्तर प्रदेश विधान परिषद की शिक्षक सीटों के चुनाव हमेशा से शिक्षा जगत की दिशा और शिक्षक नेतृत्व की परिपक्वता का महत्वपूर्ण पैमाना रहे हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा सभी छह सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने का निर्णय यह दर्शाता है कि संगठन अब केवल शिक्षक हितों की आवाज उठाने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि नीति निर्माण की प्रक्रिया में भी प्रभावी भागीदारी चाहता है।
यदि प्रत्याशियों का चयन योग्यता, ईमानदारी, संगठनात्मक प्रतिबद्धता और शिक्षक समाज के विश्वास के आधार पर होता है, तो इससे न केवल संगठन की साख बढ़ेगी बल्कि शिक्षक राजनीति को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
आज शिक्षकों के सामने नई शिक्षा नीति, डिजिटल शिक्षा, सेवा सुरक्षा, पदोन्नति, स्थानांतरण, पेंशन और शिक्षा की गुणवत्ता जैसी अनेक चुनौतियां हैं। ऐसे समय में विधान परिषद में ऐसे प्रतिनिधियों की आवश्यकता है जो राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर शिक्षक समाज की वास्तविक समस्याओं को मजबूती से रख सकें।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की यह पहल आने वाले चुनाव को और अधिक रोचक तथा प्रतिस्पर्धी बनाने वाली है। अब शिक्षक समाज की नजर इस बात पर रहेगी कि संगठन अपने घोषित मानकों के अनुरूप कितने सक्षम और जनस्वीकार्य उम्मीदवार मैदान में उतारता है।डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक