अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से चंपत राय के इस्तीफे की स्वीकृति के बाद रामनगरी में सियासी और धार्मिक हलचल तेज हो गई है। हाल ही में सामने आए चंपत राय के एक भावुक पत्र ने ट्रस्ट के भीतर पुराने और नए पदाधिकारियों के बीच तनाव को सार्वजनिक कर दिया है। इस पत्र के वायरल होने के बाद अयोध्या में बैठकों का दौर शुरू हो गया है और 22 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक से पहले संतों की एक बड़ी सभा की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
चंपत राय का भावुक पत्र और आरोपों पर चुप्पी
चंपत राय ने राम भक्तों के नाम जारी अपने पत्र में खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें ‘अनर्गल’ बताया है। उन्होंने ‘रामचरितमानस’ की चौपाई—“धीरज धर्म मित्र अरु नारी, आपद काल परिखिअहिं चारी”—का उल्लेख करते हुए अपने साथियों के प्रति उपेक्षा का दर्द बयां किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे SIT की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं और उसके बाद ही वे बिंदुवार अपना पक्ष रखेंगे। चंपत राय ने अपने 45 वर्षों के प्रचारक जीवन को ‘खुली पुस्तक’ बताते हुए अपनी निष्ठा पर जोर दिया है।
ट्रस्ट में बढ़ा आंतरिक कलह?
सूत्रों के अनुसार, चंपत राय के जाने से ट्रस्ट के कई पदाधिकारी खासे नाराज हैं। इस्तीफे के घटनाक्रम के बाद ट्रस्ट के नए महासचिव कृष्ण मोहन और कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी के बीच हुई मुलाकात ने चर्चाओं को जन्म दिया है। इसके तुरंत बाद साधु-संतों और पूर्व पदाधिकारियों के बीच हुई एक घंटे लंबी बैठक ने यह संकेत दिए हैं कि सब कुछ सामान्य नहीं है। बैठक से बाहर निकले महंतों ने केवल इतना ही कहा, “जल्द ही कुछ बड़ा होने वाला है।”
22 जुलाई की बैठक से पहले संतों की हुंकार
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आगामी 22 जुलाई को होने वाली बैठक अब अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। माना जा रहा है कि इससे पहले संतों की एक विशाल बैठक बुलाई जा सकती है, जिसमें 500 से अधिक महंत और संत शामिल हो सकते हैं। इस संभावित मंथन को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने संतों को साधने की कवायद शुरू कर दी है।
यह विवाद अब केवल दान पात्र की चोरी तक सीमित न रहकर ट्रस्ट के भविष्य और सत्ता समीकरणों पर भी सवाल खड़े कर रहा है। सभी की निगाहें अब 22 जुलाई की बैठक पर टिकी हैं कि क्या ट्रस्ट में कोई बड़ा बदलाव होगा या संतों के दबाव में कोई नई रणनीति अपनाई जाएगी।
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