अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से चंपत राय के इस्तीफे का प्रकरण अब एक नए मोड़ पर आ गया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी, महंत कमल नयन दास ने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उनके दावों के अनुसार, ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में अधिकांश सदस्य चंपत राय के इस्तीफे को स्वीकार करने के पक्ष में कतई नहीं थे।
’विश्वासघात के शिकार हुए चंपत राय’
महंत कमल नयन दास, जो कि अस्वस्थ चल रहे महंत नृत्य गोपाल दास की जगह बैठक में शामिल हुए थे, ने बताया कि ट्रस्टियों का एक बड़ा वर्ग मानता था कि चंपत राय राम मंदिर आंदोलन और इसके निर्माण कार्य के प्रमुख स्तंभ रहे हैं। बैठक में मौजूद कई न्यासियों ने तर्क दिया कि चढ़ावा चोरी की घटना के लिए चंपत राय को जिम्मेदार ठहराना उनके अब तक के योगदान को नकारने जैसा है। सदस्यों का मानना था कि चंपत राय इस पूरे घटनाक्रम में ‘विश्वासघात’ के शिकार हुए हैं और उन्हें अपने पद पर बने रहना चाहिए।
इस्तीफे के पीछे का कानूनी तर्क
महंत कमल नयन दास ने बैठक की अंदरूनी चर्चाओं का जिक्र करते हुए कहा कि चंपत राय ने न केवल चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने पर त्वरित कार्रवाई की थी, बल्कि पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर आरोपितों के घर से चोरी की धनराशि बरामद कराने में सक्रिय भूमिका भी निभाई थी। बावजूद इसके, जब इस्तीफा स्वीकार करने की बात आई, तो वरिष्ठ अधिवक्ता के. पाराशरण ने ट्रस्ट के संविधान का हवाला दिया।
पाराशरण ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुसार, यदि कोई सदस्य स्वेच्छा से इस्तीफा देता है, तो वह स्वतः प्रभावी हो जाता है और उसे अस्वीकार करने का कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है। इस कानूनी व्याख्या के बाद, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों को स्वीकार करना ट्रस्ट की मजबूरी बन गया।
फिर चर्चा में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली
गौरतलब है कि मंदिर के चढ़ावे में चोरी की खबरों ने ट्रस्ट की प्रशासनिक पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। अब महंत कमल नयन दास के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि ट्रस्ट के भीतर इस मसले पर काफी मतभेद थे।
इस खुलासे ने एक बार फिर ट्रस्ट के भीतर की अंदरूनी राजनीति और निर्णय लेने की प्रक्रिया को जनमानस के बीच चर्चा का विषय बना दिया है। मंदिर निर्माण से जुड़े करोड़ों भक्तों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि इन पदों पर नई नियुक्तियां कब और किन परिस्थितियों में होती हैं।
- विश्वासघात के शिकार हुए चंपत राय? महंत कमल नयन दास के दावों से राम मंदिर ट्रस्ट में हलचल - July 7, 2026
- अमरनाथ यात्रा में भक्तों को बड़ा झटका: महज 5 दिनों में अंतर्ध्यान हुए बाबा बर्फानी, श्राइन बोर्ड की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल - July 7, 2026
- काशी में राजनीतिक दिग्गजों का जमावड़ा: मंत्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ के बेटे की शादी में पहुंचे CM योगी, नवदंपति को दिया आशीर्वाद - July 7, 2026