आगरा में सामूहिक विवाह योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा: 1240 आवेदन निरस्त, पहले से विवाहित महिलाओं ने किया था आवेदन

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आगरा: गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए संचालित ‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना’ में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। आगरा में योजना के तहत प्राप्त 3600 आवेदनों की जब गहन प्रशासनिक जांच की गई, तो 1240 आवेदन फर्जी या अपात्र पाए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि इन आवेदनों में कई ऐसी महिलाएं भी शामिल थीं जो पहले से ही विवाहित थीं, लेकिन आर्थिक लाभ हासिल करने के उद्देश्य से उन्होंने खुद को अविवाहित बताकर आवेदन किया था।

​विस्तृत सत्यापन के बाद हुई कार्रवाई

आगरा जिले को इस वित्तीय वर्ष में 950 विवाह कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन योजना के प्रति बढ़ती रुचि के कारण आवेदनों की संख्या 3600 तक पहुँच गई। आवेदनों की अधिकता को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी दस्तावेजों का बारीकी से भौतिक सत्यापन करवाया।

जांच के दौरान कई विसंगतियां सामने आईं, जिसमें दस्तावेजों में हेरफेर से लेकर गलत जानकारी देने तक के मामले शामिल थे। प्रशासन ने इन सभी संदिग्ध और अपात्र आवेदनों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।

पारदर्शी प्रक्रिया और आर्थिक सहायता का नया स्वरूप

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकने के लिए सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी व मजबूत बनाया गया है। अब योजना के तहत पात्र वधुओं को मिलने वाली सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी।

योजना के तहत प्रत्येक पात्र जोड़े को कुल 1 लाख रुपये का लाभ दिया जाता है। इस बार के बदलाव के अनुसार पात्र वधुओं के खातों में 64 हजार रुपये सीधे भेजे जाएंगे। पूर्व में दी जाने वाली पायल और बिछुआ सामग्री के स्थान पर अब उनकी निर्धारित राशि भी लाभार्थी को नकद उपलब्ध कराई जाएगी।

​जिला प्रशासन का कहना है कि योजना का मूल उद्देश्य पात्र जरूरतमंदों की मदद करना है, इसलिए फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने के लिए भविष्य में भी इसी तरह की सख्त जांच जारी रहेगी। यह कार्रवाई सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

Dr. Bhanu Pratap Singh