आगरा विश्वविद्यालय के ‘कोहिनूर’ एसपी सरीन को भावभीनी विदाई, दादाजी महाराज का बार-बार हुआ स्मरण, कुलपति प्रो. आशु रानी की कार्यशैली की भी गूंज

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आगरा विश्वविद्यालय के ‘कोहिनूर
एसपी सरीन को भावभीनी विदाई,
दादाजी महाराज का बार-बार हुआ स्मरण, कुलपति
प्रो. आशु रानी की कार्यशैली की भी गूंज

29 वर्षों की सेवा के बाद सम्मानपूर्वक विदाई

90 के दशक में बहुत स्मार्ट थे

क्रिकेट के शौकीन इमरान खान की तरह लंबे बाल रखते थे

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आगरा। डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय यानी आगरा विश्वविद्यालय के कुलसचिव कार्यालय में अधीक्षक के पद पर कार्यरत रहे
एसपी सरीन 29 वर्षों की लंबी सेवाओं के बाद सेवानिवृत्त हो गए। विश्वविद्यालय के जुबली हॉल में उन्हें अत्यंत आत्मीयता, सम्मान और भावनात्मक माहौल के बीच विदाई दी गई। समारोह में स्वागत और सम्मान करने वालों की लंबी कतार लगी रही। कर्मचारियों, अधिकारियों, शिक्षकों और छात्र नेताओं ने एक स्वर में उन्हें विश्वविद्यालय का “कोहिनूर” बताया।

पूर्व कर्मचारियों और अधिकारियों की उपस्थिति ने समारोह को बनाया विशेष

इस विदाई समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि विश्वविद्यालय के अनेक पूर्व कर्मचारी और अधिकारी भी विशेष रूप से उपस्थित हुए। समारोह केवल औपचारिक विदाई तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह वर्षों पुराने संबंधों, यादों और विश्वविद्यालय परिवार की आत्मीयता का जीवंत उदाहरण बन गया। पूरे कार्यक्रम में अपनत्व और भावनाओं की गहरी छाप दिखाई दी।

एसपी सरीन की भावपूर्ण विदाई

दादाजी महाराज का बार-बार स्मरण, राधास्वामी नाम की गूंज

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों का भी उल्लेख हुआ। विश्वविद्यालय के पहले ऐसे कुलपति रहे जिन्होंने लगातार दो बार कुलपति पद संभालकर रिकॉर्ड बनाया,
प्रोफेसर अगम प्रसाद माथुर (दादाजी महाराज), उनका बार-बार स्मरण किया गया। समारोह के दौरान राधास्वामी मत और उसकी जीवनशैली की चर्चा भी होती रही। उपस्थित लोगों ने कहा कि दादाजी महाराज के समय विश्वविद्यालय में अनुशासन, संवेदनशीलता और पारिवारिक वातावरण का अद्भुत संगम देखने को मिलता था।

कुलपति प्रोफेसर आशु रानी ने की सेवाओं की सराहना

विश्वविद्यालय की कुलपति
प्रो. आशु रानी ने एसपी सरीन की दीर्घकालीन सेवाओं की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की मजबूती केवल भवनों या नियमों से नहीं होती बल्कि ऐसे कर्मनिष्ठ कर्मचारियों से होती है जो पूरी निष्ठा और ईमानदारी से संस्थान को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कर्मचारियों से अपेक्षा की कि वे एसपी सरीन की कार्यशैली, व्यवहार और कार्य संस्कृति से सीख लें।

मंचासीन भूपेंद्र शर्मा, अनिल गुप्ता, एसपी सरीन, प्रोफेसर आशुरानी, प्रोफेसर बृजेश रावत, अजय मिश्रा आदि।

भावुक हुए एसपी सरीन, सभी का जताया आभार

सम्मान और स्नेह से अभिभूत
एसपी सरीन स्वयं भी भावुक हो उठे। उन्होंने मंच से विश्वविद्यालय परिवार, अधिकारियों, कर्मचारियों, छात्र नेताओं और अपने सभी सहयोगियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल कार्यस्थल नहीं बल्कि उनका परिवार रहा है और यहां से मिली आत्मीयता जीवनभर उनके साथ रहेगी।

कुलसचिव अजय मिश्रा बोले- इनके रहते कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं हुई

कुलसचिव अजय मिश्रा ने कहा कि एसपी सरीन बेहद जिंदादिल इंसान हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि “इनके कारण कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।” इस टिप्पणी पर पूरा सभागार तालियों और हंसी से गूंज उठा। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि सरीन साहब कर्मचारियों और प्रशासन के बीच सेतु की भूमिका निभाते रहे।

प्रो. ब्रजेश रावत ने साझा की नियुक्ति की यादें

प्रो. ब्रजेश रावत ने कहा कि 16 अगस्त 1988 को उनकी और एसपी सरीन की नियुक्ति एक ही दिन हुई थी। उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि समय के साथ बहुत कुछ बदला, लेकिन सरीन साहब का व्यवहार, मित्रता और कार्य के प्रति समर्पण कभी नहीं बदला।

मातृशक्ति ने किया सम्मान।

डॉ स्वाति माथुर ने सुनाए युवा दिनों के किस्से

डॉ स्वाति माथुर ने अत्यंत भावुक अंदाज में कहा कि “आज मेरे बड़े भाई का विदाई समारोह है।” उन्होंने लगभग 40 वर्ष पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि एक युवा लड़का, जिसे क्रिकेट का जबरदस्त शौक था, इमरान खान का बड़ा प्रशंसक था और लंबे बाल रखता था ताकि हवा में बाल उड़ें तो वह इमरान खान जैसा लगे — वही आज सभी के बीच सम्मानित होकर खड़ा है।

उन्होंने कहा कि एसपी सरीन परिवार को बहुत महत्व देते हैं और राधास्वामी सत्संग की जीवनशैली को पूरी निष्ठा से अपनाते हैं। समाजसेवा में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का एक कर्मचारी आज अपना कार्यकाल पूरा कर रहा है लेकिन जीवन का बड़ा अध्याय अभी बाकी है और आगे उन्हें सांसारिक तथा परमार्थ दोनों क्षेत्रों में बहुत कार्य करना है।

संचालन करते अरविंद गुप्ता।

छात्र नेता महेंद्र रावत ने कहा- विश्वविद्यालय अपने कोहिनूर को विदा कर रहा

छात्र नेता एवं अधिवक्ता
महेंद्र रावत ने कहा कि पुराने साथी नई पीढ़ी को सीख देकर जाते हैं। उन्होंने कहा कि “मित्रों, सरीन साहब के रूप में आज विश्वविद्यालय अपने कर्मचारियों में से कोहिनूर को विदाई दे रहा है।

उन्होंने पुराने संघर्षों को याद करते हुए कहा कि गोलीबारी जैसे तनावपूर्ण हालातों के बीच भी दादाजी महाराज या सरीन साहब निर्भीक होकर निकलते थे। उन्होंने एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक बार जब सरीन साहब दादाजी महाराज का पत्र लेकर आए थे तो उन्हें एक रात के लिए जेल में भी रोका गया था।

महेंद्र रावत ने कुलपति प्रो. आशु रानी की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके चार वर्षों के कार्यकाल में विश्वविद्यालय के प्रति आम जनमानस का विश्वास बढ़ा है।

 100वें वर्ष समारोह की धूम होगी

कार्यक्रम का संचालन करते हुए विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के महासचिव
अरविंद गुप्ता ने कुलपति के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना का 100वां वर्ष धूमधाम से मनाया जाएगा और यह विश्वविद्यालय के गौरव का ऐतिहासिक अवसर होगा।

छात्र नेता ब्रजेश शर्मा ने कुलपति को बताया “स्टूडेंट्स की लीडर”

छात्र नेता
ब्रजेश शर्मा ने अपने संबोधन की शुरुआत राधास्वामी मत और दादाजी महाराज के स्मरण से की। उन्होंने कहा कि कुलपति प्रो. आशु रानी सदैव छात्रों की मदद के लिए तत्पर रहती हैं। यहां तक कि कई बार केवल एसएमएस के माध्यम से भी छात्रों की समस्याओं का समाधान करा देती हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है मानो वे स्वयं छात्र नेताओं की नेता हों। जब कुलपति स्वयं छात्र हित में सक्रिय हो जाती हैं तो छात्र नेताओं की आवश्यकता कम महसूस होती है।

तीन पीढ़ियों के साथ काम करने का गौरव

विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के उपाध्यक्ष
निखिल शर्मा ने कहा कि एसपी सरीन ने उनकी तीन पीढ़ियों के साथ काम किया है। यह केवल सेवा अवधि नहीं बल्कि संबंधों और विश्वास की लंबी यात्रा है।

खचाखच भरा रहा जुबली हॉल

90 के दशक की स्मार्टनेस और सेवाभाव की चर्चा

विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के पूर्व महासचिव
अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि 90 के दशक में सरीन साहब बेहद स्मार्ट व्यक्तित्व के धनी थे। वे अपने कार्य के साथ-साथ सेवा कार्यों में भी लगातार सक्रिय रहे।

मंच पर मौजूद रहे कई प्रमुख चेहरे

समारोह में भूपेंद्र शर्मा, उपकुलसचिव कैलाश बिंद और अनिल गुप्ता सहित कई प्रमुख लोग मंच पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रारंभिक संचालन सुखपाल सिंह ने किया।

जुबली हॉल में उपस्थित लोग।

संपादकीय

एसपी सरीन जैसे लोग संस्थानों की आत्मा होते हैं

डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में
एसपी सरीन की विदाई केवल एक कर्मचारी की सेवानिवृत्ति नहीं थी, बल्कि यह उस पीढ़ी को सम्मान देने का अवसर था जिसने संस्थानों को केवल नौकरी का स्थान नहीं बल्कि परिवार माना। आज के समय में जब अधिकांश लोग पद, शक्ति और व्यक्तिगत लाभ की दौड़ में दिखाई देते हैं, तब एसपी सरीन जैसे लोग यह याद दिलाते हैं कि किसी भी संस्था की असली ताकत उसकी मानवीय संवेदनाएं और रिश्ते होते हैं।

एसपी सरीन की सबसे बड़ी विशेषता यही रही कि उन्होंने प्रशासन और कर्मचारियों के बीच संतुलन बनाए रखा। यही कारण है कि कुलसचिव अजय मिश्रा को यह कहना पड़ा कि “इनके रहते कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं हुई।” यह वाक्य केवल मजाक नहीं बल्कि उनके व्यक्तित्व का प्रमाण है। वे टकराव नहीं बल्कि समाधान की सोच रखने वाले व्यक्ति रहे।

आज विश्वविद्यालयों में अक्सर दूरी, तनाव और राजनीति का माहौल देखने को मिलता है। ऐसे समय में यदि किसी कर्मचारी की विदाई में पूर्व कर्मचारी, अधिकारी, छात्र नेता और शिक्षक बड़ी संख्या में उपस्थित हों, तो यह उसकी लोकप्रियता और विश्वास का सबसे बड़ा प्रमाण होता है। एसपी सरीन ने पद से नहीं बल्कि व्यवहार से सम्मान अर्जित किया। यही कारण है कि उन्हें “कोहिनूर” कहा गया।

उनके व्यक्तित्व का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष उनकी सादगी और आध्यात्मिकता है। राधास्वामी विचारधारा से प्रभावित जीवनशैली, परिवार के प्रति समर्पण और समाजसेवा में सक्रियता ने उन्हें केवल एक प्रशासनिक कर्मचारी नहीं रहने दिया बल्कि एक प्रेरणास्रोत बना दिया।

डॉ स्वाति माथुर द्वारा सुनाया गया उनका युवा दिनों का प्रसंग — क्रिकेट प्रेम, इमरान खान जैसा व्यक्तित्व बनाने का सपना और लंबे बाल — यह दर्शाता है कि हर सफल और सम्मानित व्यक्ति के भीतर एक जिंदादिल युवा भी होता है। यही जीवंतता जीवनभर उनके साथ बनी रही।

इस समारोह में कुलपति
प्रो. आशु रानी की कार्यशैली की भी जिस तरह प्रशंसा हुई, वह यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय में संवाद और संवेदनशीलता का वातावरण मजबूत हुआ है। जब छात्र नेता स्वयं यह कहें कि कुलपति छात्रों की समस्याएं एसएमएस पर हल कर देती हैं, तब यह प्रशासन की सकारात्मक छवि को मजबूत करता है।

एसपी सरीन की विदाई ने एक बात फिर साबित कर दी कि संस्थान भवनों से नहीं, व्यक्तित्वों से महान बनते हैं। विश्वविद्यालय आने वाली पीढ़ियों को डिग्री जरूर देगा, लेकिन एसपी सरीन जैसे लोग उन्हें व्यवहार, संवेदनशीलता, सेवा और मानवीय रिश्तों का पाठ पढ़ाकर जाते हैं।

डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक

Dr. Bhanu Pratap Singh