आगरा में साइबर सेंधमारी: शास्त्री जी के खाते से 98 हजार पार, राम चौधरी के नाम पर ट्रांसफर हुई रकम; मदद के बजाय थानों के चक्कर काट रहा पीड़ित

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आगरा। ताजनगरी में साइबर अपराधियों का जाल इस कदर फैल चुका है कि अब लोग अपने बैंक खातों में भी सुरक्षित नहीं हैं। थाना एकता क्षेत्र के ब्रह्मनगर में रहने वाले दिवाकर शर्मा शास्त्री साइबर ठगी का ताजा शिकार बने हैं। शातिरों ने उनके IDBI बैंक खाते में सेंध लगाकर दो बार में 98 हजार रुपये उड़ा दिए। विडंबना देखिए कि ठगी का शिकार होने के बाद पीड़ित मदद के लिए सिस्टम की चौखट पर भटक रहा है, लेकिन उसे राहत के बजाय सिर्फ एक थाने से दूसरे थाने का रास्ता दिखाया जा रहा है।

​49-49 हजार के दो झटके, राम चौधरी के नाम गई रकम

पीड़ित दिवाकर शर्मा शास्त्री का खाता IDBI बैंक की फतेहाबाद रोड शाखा में है। शातिरों ने बड़ी ही चतुराई से 49-49 हजार रुपये के दो ट्रांजैक्शन किए। पीड़ित के मोबाइल पर जब मैसेज आया, तब तक उनके पसीने की कमाई बैंक से जा चुकी थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह रकम राम चौधरी नाम के किसी व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर की गई है।

​बैंक बंद और पुलिस की ‘फुटबॉल’ बनी फरियाद

​ठगी का अहसास होते ही पीड़ित बैंक की ओर दौड़ा, लेकिन शनिवार/अवकाश के कारण बैंक बंद होने से वह खाता तुरंत ब्लॉक नहीं करा सका। इसके बाद जब वह उम्मीद लेकर साइबर क्राइम थाने पहुँचा, तो वहां से उसे थाना एकता जाने को कह दिया गया। मदद के सबसे कीमती शुरुआती घंटों (Golden Hours) में कार्रवाई के बजाय पीड़ित को थानों के बीच चक्कर कटवाया गया, जिससे साइबर अपराधियों को बचने का और समय मिल गया।

सवालों के घेरे में साइबर सुरक्षा और सिस्टम

यह घटना आगरा पुलिस के उन बड़े दावों पर सवाल उठाती है जिनमें ‘गोल्डन ऑवर’ में कार्रवाई की बात कही जाती है। स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि:

बैंक बंद होने की स्थिति में तत्काल सहायता का कोई विकल्प क्यों नहीं मिला?

साइबर थाने ने मामले को गंभीरता से लेकर तुरंत ट्रांजैक्शन फ्रीज करने की प्रक्रिया क्यों नहीं शुरू की?

जागरूक अभियानों के बावजूद ‘राम चौधरी’ जैसे फर्जी नामों का उपयोग कर ठग कैसे बच निकल रहे हैं?

सावधानी ही बचाव है

​आगरा पुलिस और साइबर एक्सपर्ट्स लगातार सलाह देते हैं कि किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और न ही फोन पर ओटीपी (OTP) साझा करें। यदि ठगी हो जाए, तो तुरंत 1930 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज कराएं ताकि ट्रांजैक्शन को बीच में ही रोका जा सके। फिलहाल, दिवाकर शर्मा शास्त्री की फरियाद फाइलों में दबी है और पुलिस जांच की बात कह रही है।

Dr. Bhanu Pratap Singh